अफगानिस्तान में लगभग 38 लाख लड़कियों के स्कूल से बाहर रहने के कारण देश एक 'खोई हुई पीढ़ी' की ओर बढ़ सकता है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति तालिबान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से बनी हुई है।
26 लाख से ज्यादा किशोरियां शामिल
अफगान समाचार एजेंसी 'खामा प्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन ने कहा कि 7 से 18 साल की करीब 38 लाख लड़कियां स्कूल नहीं जा रही हैं। इनमें 26 लाख से ज्यादा किशोरियां शामिल हैं, जिन्हें माध्यमिक शिक्षा में पढ़ने की अनुमति नहीं है।
2.5 लाख अन्य लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से दूर
गैगनन ने बताया कि हर साल लगभग 2.5 लाख अन्य लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से वंचित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और लड़कियों पर लगातार लगाए जा रहे प्रतिबंधों का अफगानिस्तान के सामाजिक और आर्थिक विकास पर लंबे समय तक असर पड़ेगा।
सेवाओं का सामना कर रहे
संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी ने कहा कि अफगानिस्तान में आर्थिक स्थिति में कुछ हद तक स्थिरता के संकेत दिखे हैं, लेकिन विकास की रफ्तार अभी भी बहुत धीमी है। राजस्व संग्रह में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। 2026 में पड़ोसी देशों से करीब 28 लाख अफगान लोगों के लौटने की उम्मीद है, जिससे पहले से ही बेरोजगारी, गरीबी और सीमित सरकारी सेवाओं का सामना कर रहे लोगों पर दबाव बढ़ेगा।
47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2026 में लगभग 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत होगी। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) में संकट प्रतिक्रिया निदेशक एडेम वोसोर्नू ने कहा कि 47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा के खतरे का सामना कर रहे हैं, जबकि 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं। धन की कमी के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। 2021 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोकना, महिलाओं के विश्वविद्यालयों में पढ़ने पर प्रतिबंध लगाना और रोजगार तथा सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुंच सीमित करना शामिल है।