वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में काशी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को एक नया इतिहास दर्ज कर दिया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे की समयावधि में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।
इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम सुबह से ही डोमरी में मौजूद रही। नगर निगम और विभिन्न सामाजिक व सरकारी संस्थाओं के समन्वय से सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है ।
चीन का रिकॉर्ड ध्वस्त, भारत ने अपने नाम किया रिकॉर्ड
10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। रविवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषि नाथ और विश्व रिकॉर्ड रणनीतिकार निश्चल बारोट ने मौके पर मौजूद रहकर प्रत्येक गतिविधि की निगरानी की। ड्रोन कैमरों और आधुनिक डिजिटल गणना तंत्र के जरिए हुई सटीक पुष्टि के बाद ऋषि नाथ ने आधिकारिक रूप से इस नए रिकॉर्ड की घोषणा की।
60 गंगा घाटों की प्रतिकृति बना 'शहरी वन'
इस 'शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौसट्टी घाट, मान मंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा।
प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में नगर निगम के लिए आय का एक बड़ा स्रोत भी बनेगी।
छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा
नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश वन विभाग, कृषि विभाग, डूडा और नगर निगम की टीमों ने तकनीकी प्रबंधन और सिंचाई की व्यवस्था संभाली। काशी विद्यापीठ, यूपी कालेज, देहरादून पब्लिक स्कूल, मुकुलारेंडम स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन में बदल दिया।