ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष अब सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट नेटवर्क तक पहुंच गया है। ईरान की ओर से लाल सागर में मौजूद अंडरसी डेटा केबल्स को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। अगर ऐसा होता है, तो भारत समेत कई देशों में इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं, जिससे ऑनलाइन पेमेंट, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाएं ठप पड़ सकती हैं।
भारत की कनेक्टिविटी पर सीधा असर
भारत का एक बड़ा डेटा ट्रैफिक होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते अमेरिका और यूरोप तक जाता है। इन समुद्री मार्गों में बिछी केबल्स देश की डिजिटल लाइफलाइन हैं। यदि इन पर हमला होता है, तो बैंकिंग लेनदेन, सोशल मीडिया, आईटी सेवाएं और क्लाउड नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को अलर्ट जारी कर जोखिम का आकलन करने और बैकअप प्लान तैयार रखने को कहा है।
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सीमित विकल्प, बढ़ती चुनौती
कुछ डेटा ट्रैफिक को सिंगापुर या प्रशांत महासागर के रास्ते मोड़ा जा सकता है, लेकिन ये विकल्प महंगे और सीमित क्षमता वाले हैं। इससे इंटरनेट की स्पीड धीमी हो सकती है और सेवाओं में देरी देखने को मिल सकती है। हाल ही में जेद्दा के पास कई प्रमुख केबल सिस्टम में कट की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने खतरे को और वास्तविक बना दिया है। कंपनियां सतर्क हैं, लेकिन युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी सीमित है।
डेटा हब बनने के सपने पर असर
भारत खुद को वैश्विक डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें अरबों डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। लेकिन यह पूरी योजना मजबूत अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर निर्भर है। यदि अंडरसी केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो न सिर्फ मौजूदा सेवाएं प्रभावित होंगी, बल्कि गूगल और अन्य टेक कंपनियों की नई परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और इंडस्ट्री दोनों कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर समाधान खोजने में जुटे हैं।