उज्जैन में एक अनोखा शादी का निमंत्रण कार्ड लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इस कार्ड की खासियत यह है कि इसे भगवान शिव के प्रतीक त्रिशूल और डमरू के आकार में बनाया गया है। इतना ही नहीं, कार्ड में बाबा महाकाल की पवित्र भस्म भी रखी गई है। भक्ति, परंपरा और कला का यह संगम महाकाल नगरी की धार्मिक भावना को और भी विशेष बना रहा है।
त्रिशूल और डमरू का प्रतीकात्मक डिज़ाइन
उज्जैन के आजाद नगर निवासी गोयल परिवार ने बेटे पार्थ की शादी के लिए इस अद्भुत कार्ड की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने कार्ड को त्रिशूल और डमरू के रूप में बनवाया, जो भगवान शिव की शक्ति और संगीत का प्रतीक हैं। परिवार का उद्देश्य था कि शादी का निमंत्रण केवल एक सूचना न होकर श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक बने।
भस्म ने बनाया निमंत्रण को पवित्र
परिवार ने कार्ड में पीले चावल की जगह बाबा महाकाल की पवित्र भस्म रखी। उनका कहना है कि जब शादी महाकाल की नगरी में हो रही है, तो निमंत्रण में भी बाबा का आशीर्वाद होना चाहिए। दो महीने तक मंदिर से भस्म एकत्र कर यह विशेष कार्ड तैयार किया गया, जिसे हर आमंत्रित व्यक्ति श्रद्धा से ग्रहण कर रहा है।
हाथों से बने 400 निमंत्रण
परिवार के करीब 10 सदस्यों ने मिलकर लगभग 400 कार्ड खुद हाथों से बनाए। इस काम में एक महीने से अधिक का समय लगा। कार्ड के डिज़ाइन में ‘मांडना कला’ की झलक दिखाई देती है, जिसमें चावल, गेरू और सफेद मिट्टी से पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं। यह कला मालवा की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है।
सामाजिक जुड़ाव की मिसाल
इस पूरी प्रक्रिया में परिवार के साथ सेवाधाम आश्रम के बच्चों ने भी सहयोग दिया। उनके सहयोग से तैयार यह कार्ड न सिर्फ भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक संवेदना का भी उदाहरण पेश किया। कार्ड की लागत लगभग ₹250 प्रति निमंत्रण रही और कुल खर्च करीब ₹1 लाख आया।
उज्जैन में चर्चा का विषय बनी पहल
इस अनोखी पहल ने पूरे शहर में उत्सुकता जगा दी है। लोग इस कार्ड को देखकर भावविभोर हो रहे हैं और इसे संभालकर रख रहे हैं। भक्ति, संस्कृति और नवाचार का यह संगम उज्जैन के लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है कि परंपरा में आधुनिक सोच कैसे जोड़ी जा सकती है।