
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. यहां पर भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है. यहां तक की चीन ने भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है. पहलगाम हमले में शामिल द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) को पहली बार आतंकवादी हमले से जोड़ा गया है. आपको बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. इस आतंकी हमले में TRF का हाथ बताया जाता है. टीआरएफ को पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का हिस्सा माना जाता है. यूएनएससी में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट पर निगरानी रखने वाली एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम हुए हमले में टीआरफ ने तुरंत हमले की जिम्मेदारी ली थी. यहां तक की हमले वाली की जगह की तस्वीर भी शेयर की थी. मगर हमले के चार दिनों के बाद अपनी जिम्मेदारी वापस ले ली थी.
यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब यूएनएससी का अस्थाई सदस्य पाकिस्तान इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है. रिपोर्ट में पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा गया है -' यूएनएससी के एक सदस्य ने टीआरएफ के लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ रिश्तों को खारिज कर दिया है. उसने कहा कि एलईटी अब निष्क्रिय है.
भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
इस पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह एक पंक्ति पाकिस्तान के आतंकी चरित्र को उजागर करता है. इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया. हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने टीआरएफ को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित करने का ऐलान किया था. यूएनएससी 1267 (आइसीआइएस, अलकायदा) प्रतिबंध समिति की रिपोर्ट को 21 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया. इसे बुधवार को पेश किया गया।
चीन ने भी साधी चुप्पी
इस मामले में चीन ने चुप्पी साध ली है. चीन इससे पहले कई मौकों पर पाकिस्तान की मदद करता रहा है. मगर इस बार उसने भी पाक का साथ नहीं दिया है. इससे पहले आतंकी मसूद अजहर के केस में पाकिस्तान का साथ दे चुका है. उसे आतंकी की लिस्ट में शामिल होने नहीं दिया था.