उत्तर प्रदेश में शासन, प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत हर जिले में एक समन्वय समिति बनाई जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे। बैठक में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और पार्टी के जिलाध्यक्ष भी शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक फैसलों और विकास योजनाओं के काम में तेजी आएगी।
हर महीने अनिवार्य रूप से होगी बैठक
नई व्यवस्था के तहत हर जिले में महीने में कम से कम एक बार यह बैठक करना जरूरी होगा। इन बैठकों में जिले से जुड़े विकास कार्यों, योजनाओं और जनता की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन कामों में देरी हो रही है और उन्हें जल्दी कैसे पूरा किया जाए। सरकार चाहती है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें ताकि योजनाओं का फायदा सीधे जनता तक पहुंचे।
समस्याओं के समाधान के लिए तय समय सीमा
सरकार ने अधिकारियों के लिए एक गोपनीय मार्गदर्शिका भी जारी की है। इसमें कई सेवाओं के निस्तारण के लिए समय सीमा तय की गई है। स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, थाना, तहसील और स्थानीय विवाद से जुड़ी समस्याओं को सात दिनों के भीतर सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बजट और तकनीकी मंजूरी से जुड़े मामलों को अधिकतम 15 दिनों में निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
कोर कमेटी पहले तय करेगी एजेंडा
मुख्य बैठक से पहले एक कोर कमेटी बनाई जाएगी जो बैठक का एजेंडा तय करेगी। इस कोर कमेटी का काम होगा कि जिले में चल रही परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करे और जो योजनाएं लंबित हैं उन्हें बैठक में चर्चा के लिए शामिल करे। इससे बैठक अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद जताई जा रही है और फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे।
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निर्णयों की जानकारी सीधे भेजी जाएगी मुख्यमंत्री कार्यालय
इन बैठकों में लिए गए फैसलों की जानकारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। इससे सरकार को जिलों में चल रहे विकास कार्यों की सीधी जानकारी मिलती रहेगी। सरकार का कहना है कि इससे योजनाओं की निगरानी मजबूत होगी और काम की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
नई व्यवस्था पर शुरू हुई राजनीतिक बहस
इस व्यवस्था को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे प्रशासनिक बैठकों में राजनीतिक दखल बढ़ेगा। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि यह व्यवस्था जनता की समस्याओं के समाधान को तेज करने के लिए बनाई गई है। उनका दावा है कि सरकार और संगठन मिलकर काम करेंगे तो लोगों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा।