लखनऊ: उत्तर प्रदेश एटीएस ने 'मुजाहिदीन आर्मी' के सरगना मोहम्मद रज़ा को गिरफ्तार कर संगीन साजिश का भंडाफोड़ किया। रज़ा की काली डायरी में शरिया लागू करने, 13 टीमें बनाने और लक्षित हत्याओं का विस्तृत ब्लूप्रिंट लिखा था। डायरी के सातवें पन्ने पर 'कौम खतरे में' और चौदहवें पन्ने पर उर्दू में 'जिहाद की तैयारी' जैसी पंक्तियाँ मिलीं। जांच से उसके केरल-आधारित संपर्क और पाकिस्तानी नंबरों से संबंधों के सुराग भी सामने आए। मामले की आगे की जांच जारी है।
शरिया लागू करने का "ब्लूप्रिंट" — काली डायरी के खुलासे
एटीएस ने बताया कि रज़ा की काली डायरी में हर टीम के नाम और जिम्मेदारियों का जिक्र है — उन्नीस या तेरह टीमों के नंबर, कोडवर्ड और लक्षित व्यक्तियों की सूची रिकॉर्ड थी। डायरी में हिंदू धार्मिक गुरु को कोड "काफिर" बताकर निशाने का संकेत भी था। प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने मिलने और फंडिंग के तौर-तरीकों की बात कबूल की है। ये दस्तावेज़ संगीन साजिश के प्राथमिक सबूत माने जा रहे हैं।
नेटवर्क और विदेश कनेक्शन — केरल से लखनऊ तक
एटीएस के अनुसार रज़ा मूलतः फतेहपुर का निवासी है लेकिन मलप्पुरम (केरल) में सक्रिय था; उसके मोबाइल से पाकिस्तानी नंबर मिले हैं जिनकी पड़ताल जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर कोडवर्ड (जैसे 'लाइब्रेरी' = मुलाकात, 'दावत' = हथियार) का इस्तेमाल करके भर्ती और समन्वय किया जा रहा था। जांच यह पता लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि क्या कोई बाहरी हेंडलर या फंडिंग चैनल सक्रिय था।
गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया
रज़ा को मलप्पुरम से गिरफ्तार कर लखनऊ ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया। एटीएस ने पहले भी कुछ साथियों को गिरफ्तार कर लिया था जिनसे मोबाइल और वित्तीय रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। आरोपियों को संबंधित स्पेशल कोर्ट में पेश करने और विस्तृत पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियाँ स्थानीय चेतावनी सतर्क रखे हुए हैं।
सामाजिक असर और आगे की संभावनाएँ
स्थानीय प्रशासन और पुलिस-प्रशासन ने समुदायों को शांत रहने की अपील की है और कहा है कि धार्मिक भावनाओं का शोषण कर आपराधिक साजिश रची गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सन्देशों पर निगहबानी और युवा-स्तर पर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है ताकि ऐसे नेटवर्कों की भर्ती रोकी जा सके। मामले की नेशनल और इंटर-स्टेट स्तर पर जाँच जारी है।