उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत यदि कोई चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद 10 मिनट से अधिक की देरी करता है, तो उसकी राइड स्वतः रद्द मानी जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित चालक पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे यात्रियों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।
ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य
नए नियमों में सभी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के लिए ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जा सकता है। इसके तहत चालकों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस सत्यापन और स्वास्थ्य परीक्षण से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। जिन चालकों के दस्तावेज पूरे नहीं होंगे, उन्हें सेवा देने की अनुमति नहीं मिलेगी। सरकार इससे टैक्सी सेवाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है।
महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
प्रस्तावित नियमों में महिला यात्रियों की सुरक्षा को प्रमुखता दी गई है। यदि कोई चालक नशे की हालत में वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका पंजीकरण स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा यात्रियों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
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पुरानी गाड़ियों पर भी नजर
सरकार सड़कों पर चल रही पुरानी टैक्सी गाड़ियों को लेकर भी नए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार टैक्सी के रूप में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की अधिकतम आयु तय की जाएगी। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। साथ ही वाहनों की नियमित जांच पर भी जोर दिया जाएगा।
किराया और चालक का हिस्सा
नए नियमों के तहत यात्रियों से न्यूनतम 3 किलोमीटर का किराया लिया जाएगा। वहीं निजी वाहन के जरिए टैक्सी सेवा देने वाले चालकों को कुल किराए का 80 प्रतिशत हिस्सा देने का प्रस्ताव है। इससे चालकों की आय में स्थिरता आएगी और उन्हें बेहतर सुविधा देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
यात्रियों को मिल सकता है फायदा
सरकार का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से यात्रियों को समय पर सेवा, अधिक सुरक्षा और बेहतर अनुभव मिलेगा। वहीं टैक्सी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी की शिकायतों में कमी आ सकती है। अब परिवहन विभाग की ओर से इन नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।