यूपी विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन काफी गरम रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बाद आज सीएम योगी आदित्यनाथ जवाब देने वाले हैं, ऐसे में विपक्ष पहले से ही आक्रामक दिखा। सवाल-जवाब के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।
स्पीकर सतीश महाना नाराज, 10 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित
प्रश्नकाल के दौरान टोका-टोकी बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज हो गए। भाजपा विधायक के खड़े होने पर उन्होंने कहा कि सदन चलाना उनका काम है। गुस्से में उन्होंने हेडफोन उतारकर रख दिया और 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही रोक दी। बाद में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी सुनाकर माहौल हल्का किया, जिसके बाद सदन में तालियां भी बजीं।
विधान परिषद में सपा का वॉकआउट
विधान परिषद में शिक्षा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने जोरदार हंगामा किया। सपा सदस्यों ने सरकार पर सही जवाब न देने का आरोप लगाया। एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला दिए जाने पर विपक्ष असंतुष्ट दिखा और नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गया। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।
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भर्तियों और आरक्षण पर गरमागरम चर्चा
सपा विधायक रागिनी सोनकर ने लोक सेवा आयोग की भर्तियों और आरक्षण में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। जवाब में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि 2017 से अब तक 47,407 पदों पर भर्ती की गई है और आरक्षण नियमों का पालन हुआ है। उन्होंने कहा कि ओबीसी को तय प्रतिशत से ज्यादा पद दिए गए हैं। इस बयान पर फिर से सदन में बहस तेज हो गई।
कोविड मुकदमे और अन्य मुद्दे भी उठे
सपा विधायक फहीम इरफान ने कोविड काल के मुकदमों को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि आम लोगों के केस वापस हुए, लेकिन जनप्रतिनिधियों के नहीं। इस पर स्पीकर ने सरकार को मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया। वहीं आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी उठी, जिस पर श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत ऐसा संभव नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी और आगे की रणनीति
सदन में औद्योगिक विकास, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने दावा किया कि लाखों लोगों को रोजगार मिला है और विकास दर बढ़ी है। विपक्ष ने इन दावों पर सवाल उठाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री अपने जवाब में विपक्ष के आरोपों का कैसे जवाब देते हैं। बजट सत्र का माहौल फिलहाल पूरी तरह सियासी गर्मी में है।