उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत राज्य में एक्रेडिटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग (ADT) सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटरों में तय ट्रेनिंग पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को फॉर्म-5 जारी किया जाएगा। इसके बाद कई मामलों में ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। योजना की शुरुआत सबसे पहले फर्रुखाबाद से होगी, जबकि दूसरा सेंटर कानपुर में बनाया जाएगा। बाद में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।
28 दिन में सिखाई जाएगी सुरक्षित ड्राइविंग
इन सेंटरों पर अभ्यर्थियों को 28 दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें सिमुलेटर के जरिए अभ्यास, सड़क पर ड्राइविंग, ट्रैफिक नियम, रोड सेफ्टी, वाहन नियंत्रण और सुरक्षित ड्राइविंग की पूरी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान सेंसर और ऑटोमैटिक ट्रैक की मदद से ड्राइविंग स्किल का आकलन भी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सिर्फ लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और जिम्मेदार ड्राइवर तैयार करना है।
फॉर्म-5 के बाद सीधे मिलेगा DL
ट्रेनिंग पूरी होने पर अभ्यर्थियों को फॉर्म-5 दिया जाएगा, जो इस बात का प्रमाण होगा कि वह निर्धारित मानकों पर खरा उतरा है। इसके बाद फॉर्म अपलोड, बायोमेट्रिक प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के सत्यापन के बाद ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। यानी अलग से ड्राइविंग टेस्ट देने की आवश्यकता नहीं होगी। इस पूरी प्रक्रिया की अनुमानित फीस करीब छह हजार रुपये हो सकती है।
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सड़क सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
परिवहन विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और सड़क हादसों में भी कमी आएगी। प्रशिक्षित और प्रमाणित ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिलने से नियमों का पालन बेहतर होगा। सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण के जरिए प्रदेश में सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति को बढ़ावा देना है।