CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए आवश्यक दवाओं की खरीद में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अनुपूरक बजट 2025-26 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया, जिसमें आयुष्मान भारत और एनआरएचएम के तहत दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर है।
2024 में दवा खरीद की तादाद बढी
विभागीय अफसरों का कहना है कि योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से दवाओं की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। निगम और इंडिया हेल्थ एक्शन ट्रस्ट के आंकडों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच कुल दवाओं की क्रय राशि काफी बढ़ी है। विशेष रूप से यूपीएमएससीएल की वार्षिक दवा क्रय राशि 2019 में लगभग $58 मिलियन (करीब ₹480-500 करोड़) से बढ़कर 2024 में $112 मिलियन (करीब ₹930-950 करोड़) हो गई, जिसमें 2020 में कोविड-19 के कारण कुछ गिरावट आई थी, लेकिन उसके बाद तेजी से वृद्धि हुई।
वर्षवार अनुमानित दवा क्रय राशि
2021-22 : करीब ₹600-700 करोड़ के आसपास, जहां कोविड संबंधित दवाओं की खरीद प्रमुख थी
2022-23: ₹800 करोड़ से अधिक, सामान्य दवाओं और सप्लाई चेन सुधार के साथ वृद्धि
2023-24: ₹900 करोड़ के करीब, गुणवत्ता नियंत्रण और वेयरहाउस विस्तार के साथ
2024-25: ₹950 करोड़ से ऊपर पहुंची, जिसमें कुल क्रय दोगुनी से अधिक हो गई
राज्य सरकार ने बीते पांच सालों में कुल मिलाकर यूपीएमएससीएल के माध्यम से करीब ₹3,000-3,500 करोड़ या उससे अधिक की दवाएं खरीदीं। यह वृद्धि योगी सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, मुफ्त दवा योजना और बेहतर सप्लाई चेन प्रबंधन का परिणाम है।
दवा वितरण में सुधार दर्ज
2025 में ही डायलिसिस, सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं के साथ दवा वितरण में सुधार दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में दवाओं की खरीद उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा की जाती है। यह पूरी तरह पारदर्शी ई-टेंडर प्रक्रिया पर आधारित है। कंपनियां जेम पोर्टल या यूपीएमएससीएल की वेबसाइट पर टेंडर में भाग लेती हैं। गुणवत्ता जांच, दरें और डिलीवरी शर्तों के आधार पर चयन होता है। इससे पहले बिना टेंडर के स्थानीय खरीद की अनुमति थी, लेकिन अब केंद्रीकृत सिस्टम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।
पिछले कार्यकाल में आईं थी शिकायतें
योगी के पिछले कार्यकाल (2017-2022) में दवा खरीद में कुछ अनियमितताओं की शिकायतें आई थीं, मुख्य रूप से पहले की व्यवस्था में। जांच विभिन्न स्तरों पर हुई, जिसमें सतर्कता विभाग और संबंधित कमेटियों ने भूमिका निभाई। कुछ मामलों में कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया। परिणामस्वरूप यूपीएमएससीएल का गठन मजबूत हुआ और नई पारदर्शी नीति लागू की गई। आज दवा आपूर्ति में सुधार साफ दिखता है, नकली दवाओं पर सख्ती और जांच बढ़ी है। योगी मॉडल ने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है, जिससे सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी कम हुई और मरीजों का भरोसा बढ़ा।