लखनऊ। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की हृदयविदारक घटना के बाद प्रदेश सरकार ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए सीवर और पेयजल पाइपलाइनों की गहन जांच के निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद द्वारा सभी नगर निकायों और संबंधित विभागों को जारी शासनादेश में स्पष्ट कहा गया है कि पेयजल पाइपलाइनों में किसी भी प्रकार का फूट, रिसाव या लीकेज पाए जाने पर उसे तत्काल ठीक कराया जाए, ताकि इंदौर जैसी त्रासदी उत्तर प्रदेश में न दोहराई जाए।
सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले के लिए बड़ा झटका
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का गंदा पानी मिल गया था, जिससे दूषित पानी की सप्लाई हुई। लैब रिपोर्ट्स में सीवर बैक्टीरिया की पुष्टि हुई और अब तक 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। यह घटना भारत के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। इस घटना से सबक लेते हुए यूपी सरकार ने प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर लाइनों की संयुक्त जांच अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। शासनादेश में कहा गया है कि पुरानी पाइपलाइनों, घनी आबादी वाले इलाकों और जहां सीवर व पेयजल लाइनें पास-पास या एक के नीचे-ऊपर हैं, उन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए। जांच टीमों को लीकेज का पता चलने पर 48 घंटे के अंदर मरम्मत कराने के सख्त निर्देश हैं।
पानी की गुणवत्ता जांच अनिवार्य
इसके अलावा, जल स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट्स और स्टोरेज टैंकों से नियमित सैंपलिंग कर पानी की गुणवत्ता जांच अनिवार्य की गई है। नगर निगमों और जल निगम को निर्देशित किया गया है कि शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और मरम्मत से न केवल स्वास्थ्य जोखिम कम होंगे, बल्कि जल संसाधनों का संरक्षण भी होगा।
पानी में मिले गंध तो करें सूचित
योगी सरकार की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि यदि कहीं पानी में गंध या असामान्यता दिखे तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। इस अभियान से उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में पेयजल आपूर्ति और अधिक सुरक्षित व विश्वसनीय बनेगी।