ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जिलों में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर एक नवंबर 2026 से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
यह निर्णय शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, प्रमुख सचिव अनिल कुमार और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ. आरपी सिंह ने सार्वजनिक किया। बैठक में चारों जिलों के अधिकारियों ने प्रदूषण नियंत्रण की मौजूदा स्थिति और प्रयासों का ब्यौरा दिया।
बैठक में पेश किए गए आंकड़े
साल 2023 से अब तक कुल 2552 वाहनों को जब्त किया गया और 20075 वाहनों को एनओसी जारी की गई। प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स में गौतमबुद्ध नगर सबसे आगे रहा, जहां सात स्थानों को गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। गाजियाबाद और बुलंदशहर में पांच-पांच तथा हापुड़ में दो हॉटस्पॉट पाए गए।
डस्ट मैनेजमेंट और सफाई व्यवस्था
सड़क किनारे धूल रोकने के लिए गौतमबुद्ध नगर में 224 वाटर स्प्रिंक्लर और 94 एंटी स्मॉग गन तैनात हैं। गाजियाबाद में 41 स्प्रिंक्लर और 107 एंटी स्मॉग गन, बुलंदशहर में 59 स्प्रिंक्लर और पांच एंटी स्मॉग गन, जबकि हापुड़ में तीन-तीन स्प्रिंक्लर और एंटी स्मॉग गन का उपयोग किया जा रहा है।
निरीक्षण और कार्रवाई
डस्ट रोकथाम की दिशा में एप पर कुल 884 परियोजनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से 759 का सेल्फ ऑडिट किया गया और 454 मामलों में विभागीय अधिकारियों ने भौतिक निरीक्षण किया। इस साल अब तक 1100 से अधिक पुराने वाहनों पर कार्रवाई की गई है, जिसमें चालान, जब्ती और जुर्माना शामिल है।
पराली और पटाखों पर नियंत्रण
राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने दावा किया कि इस दीपावली के बाद प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने, पटाखों और वाहनों पर नियंत्रण के लिए पहले से ही व्यापक तैयारी की गई थी। हॉटस्पॉट क्षेत्रों में फॉगिंग, वाटर स्प्रिंक्लिंग और स्वीपिंग मशीनों का उपयोग बढ़ाया गया।
लक्ष्य और प्रभाव
प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने बताया कि बैठक का उद्देश्य एनसीआर में पीएम 2.5 और पीएम 10 स्तर को 20-30 प्रतिशत तक कम करना है। पुराने वाहनों पर प्रतिबंध से वाहन उत्सर्जन में 40 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है। यह कदम दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।