मध्य पूर्व में बढ़ते ईरान-इजराइल संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर तक पहुंच चुका है. जिले के करीब दो दर्जन से ज्यादा लोग ईरान में फंसे हुए हैं. ये सभी कर्बला की जियारत के लिए ईरान गए थे और वापसी की तैयारी कर ही रहे थे कि इसी बीच क्षेत्र में बढ़े तनाव के चलते फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं और एयरबेस बंद हो गए. इस घटनाक्रम ने यूपी के कई परिवारों को चिंता में डाल दिया है.
शाहपंजा की फरिदा सरवत फंसी ईरान में
शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के शाहपंजा मोहल्ले की रहने वाली फरिदा सरवत भी उन्हीं भारतीयों में शामिल हैं जो ईरान में फंसी हुई है. फरिदा के चार छोटे बच्चे रोजाना वीडियो कॉल पर मां की झलक देखने के लिए तड़पते हैं. बच्चों की आंखों में हर वक्त आंसू हैं और वो लगातार मां की सलामती की दुआ कर रहे हैं. परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील की है कि फरिदा समेत सभी फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जाए.
“हर कॉल के बाद बेचैनी और बढ़ जाती है”
फरिदा के परिवार का कहना है कि वो लगातार संपर्क में हैं, लेकिन स्थिति को लेकर असहाय महसूस कर रहे हैं. उनके पास अब बस यही उम्मीद बची है कि भारत सरकार जल्द कोई ठोस कदम उठाएगी. परिवार का कहना है कि उनकी आंखों से नींद और दिल से सुकून छिन चुका है.
मुफ्तीगंज के करीब 20 लोग फंसे
जौनपुर के मुफ्तीगंज मोहल्ले से भी करीब 20 लोग ईरान में फंसे हैं. सभी कर्बला की यात्रा पर गए थे और अब तनावपूर्ण हालात के बीच वहां रुकने को मजबूर हैं. उनके परिजनों की चिंता हर बीतते पल के साथ गहराती जा रही है. सरकार से उन्हें बस एक ही आस है कि हमारे अपने सुरक्षित लौट आएं.
वैश्विक संकट, स्थानीय असर
जौनपुर के इन परिवारों की कहानी इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक संघर्षों का प्रभाव स्थानीय जीवन पर भी गहराई से पड़ता है. बेबस परिजनों की आंखों में इंतजार है और दिल में उम्मीद है कि भारत सरकार अपने नागरिकों को जल्द सुरक्षित वापस लाएगी.
ईरान में फंसे यूपी के दर्जनों लोगों की सुरक्षित वापसी को लेकर परिजनों की भावनात्मक अपील सामने आ रही है. अब सबकी निगाहें भारत सरकार की ओर हैं कि कब उन्हें राहत की खबर मिलेगी और कब उनके अपने घर लौटेंगे.