
UP International Trade Show 2025: उत्तर प्रदेश की मिट्टी में छिपी अनगिनत कहानियां कारीगरों की मेहनत और परंपराओं की धागों से बुनी हुई हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2025) में ये कहानियां दुनिया के सामने आएंगी। हॉल नंबर 9 में लगा ODOP पवेलियन उत्तर प्रदेश के 75 जिलों की आत्मा को 343 स्टॉल्स पर प्रदर्शित करेगा। यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ का सपना है, जो हर कारीगर को वैश्विक बाजार तक ले जाएगा। योगी सरकार का यह विजन उत्तर प्रदेश को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करेगा।
विश्व मंच पर बिखरेगा यूपी का हुनर
भदोही के बुनकर रंग-बिरंगे कालीन से न्यूयॉर्क के घरों को सजाएंगे। फिरोजाबाद के शीशमजाज चमकते ग्लास आर्ट के रूप में यूरोप में अपनी पहचान बनाएंगे। मुरादाबाद के धातु कारीगर और सहारनपुर के लकड़ी के कारीगर अपनी परंपरागत कला से वैश्विक बाजार में नए अवसर बनाएंगे। ODOP पवेलियन परंपरा और आधुनिकता का संगम होगा, जहां स्टार्टअप्स, डिजाइनर्स और अंतरराष्ट्रीय खरीदार नेटवर्किंग और साझेदारी करेंगे। सस्टेनेबल इनोवेशन के जरिये पारंपरिक शिल्पों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नया जीवन दिया जाएगा।
जिलों की अनमोल कहानियां और उत्पाद-
फिरोजाबाद: चमकते शीशमजाज और ग्लास आर्ट, घरों को सजाएंगे।
हाथरस: हींग, मसालों का राजा, रसोई को सुगंधित बनाएगा।
हापुड़: हथलूम बेडशीट्स, सूती धागों से आराम और गर्माहट।
गौतम बुद्ध नगर: टेक्सटाइल्स और ज्वेलरी, फैशन और महिला सशक्तिकरण।
मुरादाबाद: मेटल फर्नीचर, मजबूत धातु से रची सजावट।
बरेली: जरि-जर्दोजी, सोने-सिक्कों की कढ़ाई, परंपरा का प्रतीक।
आगरा: लेदर एक्सेसरीज, ताज नगरी का चमड़ा, स्टाइल का प्रतीक।
मेरठ: स्पोर्ट्स प्रोडक्ट्स और मसाले, ऊर्जा और स्वाद का संगम।
कन्नौज: परफ्यूम्स और एसेंशियल ऑयल्स, खुशबू से मोहक।
कानपुर देहात: पीई पाइप्स, आधुनिक इंजीनियरिंग और विकास।
वाराणसी: सिल्क और बनारसी साड़ियां, गंगा की गोद से निकली रेशमी कहानियां।
बाराबंकी: हथलूम, सादगी भरी कला, रोजमर्रा की सुंदरता।
कानपुर: लेदर प्रोडक्ट्स और सैडलरी, मजदूरों का हुनर।
चित्रकूट: वुडन टॉयज, लकड़ी के खिलौने और बचपन की मासूमियत।
सीतापुर: हथलूम रग्स, फर्श पर बिछी परंपरा।
बुलंदशहर: खुरजा पॉटरी और सिरेमिक ज्वेलरी, मिट्टी का जादू।
भदोही और मिर्जापुर: कालीन, धागों से बुनी धरती की कहानी।
गाजियाबाद: इंजीनियरिंग गुड्स, तकनीक और भविष्य का निर्माण।
लखनऊ: चिकन एम्ब्रॉयडरी, राजधानी की नाजुक कढ़ाई।
फतेहपुर: आयरन चुल्हा, ग्रामीण जीवन का साथी और स्वावलंबन।
एटा: घुंघरू, घंटियां और ब्रास आइटम्स, संगीत और पूजा की ध्वनि।
मैनपुरी: तक्षी आर्ट, नक्काशीदार कला और इतिहास की किताब।
फर्रुखाबाद: जरि-जर्दोजी, चमकदार धागे और उत्सव की रौनक।
संत कबीर नगर: होसीरी, सूती कपड़े और सादगी का गौरव।
जौनपुर: ऊनी रग्स, ठंडक और गर्माहट का संतुलन।
प्रतापगढ़: आंवला प्रोडक्ट्स, स्वास्थ्य का खजाना।
संभल: सिल्क आर्ट, रेशम की चमक और कारीगरी का फख्र।
पीलीभीत: वुड प्रोडक्ट्स, जंगल की देन और घर की शोभा।
आजमगढ़: सिल्क साड़ियां, पूर्वांचल की सुंदरता।
बागपत: हथलूम, खेतों से निकली धागों की कहानी।
औरैया: देसी घी और मिल्क प्रोडक्ट्स, शुद्धता और पोषण।
अमेठी: मूंज प्रोडक्ट्स, घास से बने पर्यावरण अनुकूल सामान।
झांसी: सॉफ्ट टॉयज, नरम खिलौने और खुशियों का घर।
कुशीनगर: केले, फलों का राजा और समृद्धि का प्रतीक।
अलीगढ़: लॉक्स और मेटल हैंडीक्राफ्ट्स, सुरक्षा और कला का संगम।
सुल्तानपुर: मूंज क्राफ्ट्स, हस्तशिल्प की मिसाल।
सहारनपुर: वुडन किचनवेयर, लकड़ी का रसोईघर।
प्रयागराज: मूंज क्राफ्ट्स और अचार, संगम की नगरी का स्वाद और शिल्प।
मथुरा: ठाकुर जी का परिधान, भक्ति और आस्था का रंग।
UPITS 2025: मेहनत को सम्मान और नई संभावनाएं
ये उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि कारीगरों की रात-दिन की मेहनत का प्रतीक हैं। UPITS 2025 इस मेहनत को सम्मान देगा और नई संभावनाएं रचेगा। उत्तर प्रदेश के हर कोने से उठी यह आवाज दुनिया को बताएगी: हमारी विरासत अमर है, और हमारा सपना वैश्विक। जब लोकल चमकेगा, तो ग्लोबल रोशन होगा।