उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद से जुड़े फर्जीवाड़े, गलत रजिस्ट्री और वर्षों तक अदालतों में अटके रहने वाले केस अब इतिहास बन सकते हैं. योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पूरे राज्य में टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्री लागू करने का फैसला लिया है. अब रजिस्ट्री सिर्फ कागजों के भरोसे नहीं होगी, बल्कि सरकार पहले यह जांचेगी कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उसका मालिक है या नहीं. इस फैसले ने रियल एस्टेट बाजार से लेकर लाखों घर खरीदारों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
क्यों बदलना पड़ा सिस्टम?
अब तक यूपी में रजिस्ट्री सिर्फ उन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर हो जाती थी, जो बेचने और खरीदने वाले व्यक्ति लेकर आते थे. इसी वजह से फर्जीवाड़ा सबसे ज्यादा होता था किसी और की जमीन किसी और ने बेच दी, एक प्लॉट कई लोगों को बेच दिया गया, और हजारों केस कोर्ट में अटक गए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गंभीर समस्या पर सख्त रुख अपनाया और रजिस्ट्रेशन विभाग को सुरक्षित, टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया. यही वजह है कि अब टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्री का मॉडल लागू किया जा रहा है, जो दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले ही सफल साबित हुआ है.
ये भी पढ़ें : Airbus ने वापस बुलाए 6000 A320 विमान, दुनिया भर में उड़ानेंप्रभावित, पढ़ें अपडेट
टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्री कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रिकॉर्ड में संपत्ति का असली मालिक कौन है. राजस्व विभाग, नगर निकाय और रजिस्ट्री विभाग के सभी रिकॉर्ड आपस में लिंक किए जाएंगे. सब-रजिस्ट्रार ऑनलाइन डेटाबेस में सीधे देख सकेगा कि जमीन पर किसका साफ-सुथरा अधिकार है. जिसके नाम पर क्लियर टाइटल होगा, वही प्रॉपर्टी बेच सकेगा. इससे सिस्टम पारदर्शी बनेगा और फर्जी रजिस्ट्री लगभग असंभव हो जाएगी.
खरीदारों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम लोगों को मिलेगा. अब जमीन खरीदते समय धोखाधड़ी, दोहरी बिक्री या छुपे हुए विवादों का खतरा काफी कम हो जाएगा. सरकार पहले ही टाइटल की जांच कर चुकी होगी, इसलिए खरीदार को सुरक्षित प्रॉपर्टी मिल सकती है. ड्यू डिलिजेंस आसान होगा और कोर्ट में चलने वाले जमीन विवादों की संख्या में भी भारी कमी आएगी. हालांकि विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि खरीदारों को गैर-रजिस्ट्री दस्तावेजों की अपनी तरफ से भी जांच करनी चाहिए.