दिल्ली केस की जांच आगे बढ़ने के साथ ही यूपी में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता मोड में आ गई हैं। इसी बीच योगी सरकार ने ऐसा आदेश जारी किया है जिसने मदरसा प्रशासन से लेकर मौलवियों तक सभी को हैरान कर दिया है। प्रयागराज में ATS द्वारा भेजा गया एक पत्र पूरे प्रदेश में खलबली मचा रहा है। इस पत्र में साफ-साफ कहा गया है कि जिले के हर मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों, पढ़ाने वाले मौलवियों, प्रबंधकों और स्टाफ से लेकर सभी लोगों की पूरी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाए नाम, पिता का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर और पहचान तक। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये कदम बड़ी सावधानी और सुरक्षा कारणों से उठाया गया है, जिससे किसी भी तरह की गलत गतिविधि प्रदेश में पनपने न पाए।
आदेश ‘अति आवश्यक’ श्रेणी में जारी
ATS द्वारा 15 नवंबर को भेजे गए पत्र में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से तुरंत रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह आदेश ‘अति आवश्यक’ श्रेणी में जारी हुआ, जिससे साफ है कि मामला बेहद संवेदनशील है। ATS ने यह भी बताया कि यह जानकारी लखनऊ मुख्यालय के विशेष निर्देश पर जुटाई जा रही है, यानी यह सिर्फ प्रयागराज नहीं बल्कि पूरे यूपी की एक बड़ी सुरक्षा कवायद का हिस्सा है। जैसे ही यह लेटर सामने आया, अंदाजा लगाया जाने लगा कि राज्य के सभी जिलों को इसी तरह की सूची तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इससे साफ है कि सरकार अब प्रदेश भर में मदरसों की गहन मैपिंग और वेरिफिकेशन अभियान शुरू करने जा रही है।
मदरसों में आने-जाने वालों का रिकॉर्ड अधूरा
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को कई जिलों से रिपोर्ट मिली थी कि कुछ मदरसों में आने-जाने वालों का रिकॉर्ड अधूरा है और कई जगहों पर छात्रों के नामांकन से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट नहीं मिली थी। इसके अलावा कुछ मौलवियों की पहचान और उनके आने के स्रोत को लेकर भी सवाल उठे थे। इन्हीं संभावित जोखिमों के चलते ATS ने पहली बार इतनी विस्तृत जानकारी मांगी है। यह कदम प्रदेश को किसी भी गलत गतिविधि से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है। योगी सरकार की ज़ीरो-टॉलरेंस नीति के तहत अब कोई भी संस्थान नियमों से बाहर नहीं रहेगा — चाहे वह स्कूल हो, कॉलेज हो या मदरसा।
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पूरा डेटा अब सिस्टम में दर्ज होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई से आगे चलकर बड़ा बदलाव जरूर देखने को मिलेगा। जिन मदरसों में रिकॉर्ड ठीक है वहां किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जहां गड़बड़ियां मिलीं, वहां कार्रवाई तय है। मौलवियों और प्रबंधकों के व्यक्तिगत वेरिफिकेशन से लेकर बच्चों और स्टाफ के पूरे डेटा तक सब अब सिस्टम में दर्ज होगा। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यूपी में पहली बार मदरसों का इतना बड़ा सर्वे होने जा रहा है, और इसके असर दूर तक देखने को मिलेंगे।