UP MLC Elections : उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इन चुनावों को दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवार मैदान में हैं। दोनों पार्टियां अपने समर्थकों को एकजुट करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुटी हैं।
स्नातक सीटों पर आमने-सामने उम्मीदवार
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कई सीटों पर बीजेपी और सपा के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है। लखनऊ सीट पर बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह के सामने सपा की कांति सिंह हैं। आगरा में बीजेपी के डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह और सपा के आकाश अग्रवाल के बीच मुकाबला है। मेरठ-सहारनपुर सीट पर बीजेपी के दिनेश गोयल और सपा के प्रमेंद्र भाटी चुनाव लड़ रहे हैं। वाराणसी-मिर्जापुर सीट पर बीजेपी के केदारनाथ सिंह के सामने सपा के आशुतोष सिन्हा हैं। वहीं, इलाहाबाद-झांसी सीट पर बीजेपी के अशोक कुमार राठौर और सपा के डॉ. मान सिंह यादव आमने-सामने हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांति सिंह के समर्थन में मतदान की अपील भी की है।
शिक्षक सीटों पर भी कड़ी टक्कर
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला दिलचस्प है। लखनऊ सीट पर बीजेपी के उमेश द्विवेदी के सामने सपा के सुशील कुमार पटेल हैं। मेरठ-गाजियाबाद में बीजेपी के श्रीचंद शर्मा का मुकाबला सपा के नितिन कुमार तोमर से है। बरेली-मुरादाबाद सीट पर बीजेपी के डॉ. हरिसिंह ढिल्लो और सपा के हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर मैदान में हैं। वाराणसी में बीजेपी के डॉ. प्रमोद मिश्रा के सामने सपा के लाल बिहारी यादव हैं। आगरा-अलीगढ़ सीट पर बीजेपी के हरी किशोर तिवारी और सपा के डॉ. प्रकाश चंद गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी के सामने सपा के डॉ. संजय त्रिपाठी हैं।
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बागी उम्मीदवारों से बीजेपी की मुश्किलें
इन चुनावों में बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, गोरखपुर-फैजाबाद सीट से डॉ. संजय त्रिपाठी बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। ऐसे उम्मीदवार चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं, हालांकि उनका वास्तविक असर मतदान के नतीजों से ही स्पष्ट होगा। इसके अलावा, टिकट वितरण से नाराज कुछ नेताओं की नाराजगी भी बीजेपी के लिए चुनौती मानी जा रही है। फैजाबाद के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने हाल ही में पत्र जारी कर अपने अपमान का बदला लेने की अपील की थी।
विधानसभा चुनाव से पहले अहम परीक्षा
विधान परिषद की इन 11 सीटों पर होने वाला चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के संगठन और समर्थन का संकेत दे सकता है। बीजेपी और सपा दोनों के लिए अपने उम्मीदवारों को जिताना महत्वपूर्ण है, लेकिन इन चुनावों के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव के परिणामों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होता है। ऐसे में उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं तक पहुंच नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।