उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए शुक्रवार को हुए मतदान में 55.24 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत स्नातक सीटों की तुलना में अधिक रहा। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक 79.01 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 38.02 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले।
आगरा में सर्वाधिक 51 प्रतिशत मतदान दर्ज
इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए अहम माना जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में गोरखपुर-फैजाबाद में 79.01 प्रतिशत, बरेली-मुरादाबाद में 73.69 प्रतिशत, वाराणसी में 68.21 प्रतिशत, आगरा में 63.84 प्रतिशत, मेरठ में 60.80 प्रतिशत और लखनऊ में 50.92 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में आगरा में सर्वाधिक 51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
मतगणना 27 अक्टूबर को होगी
इलाहाबाद-झांसी में 41.40 प्रतिशत, वाराणसी में 41.01 प्रतिशत, मेरठ में 39.81 प्रतिशत और लखनऊ में 38.02 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इन चुनावों के लिए मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, उन्नाव, कानपुर और कानपुर देहात को छोड़कर शेष 72 जिलों में मतदान कराया गया। चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ ग
इस बीच, गोरखपुर और फतेहपुर में भाजपा और सपा समर्थकों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं। गोरखपुर के डीएवी डिग्री कॉलेज में दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। सपा उम्मीदवार डॉ. संजयन त्रिपाठी की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई।
जबरन मतदान कराने के आरोपों को लेकर विवाद
वहीं, फतेहपुर जिले के विजयीपुर ब्लॉक में सुबह करीब 10 बजे मतदान केंद्र के बाहर भाजपा और सपा समर्थकों के बीच कथित तौर पर जबरन मतदान कराने के आरोपों को लेकर विवाद हो गया। तीखी बहस के बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। हालांकि, जबरन मतदान कराने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।