उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची के सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ड्राफ्ट के अनुसार यूपी से 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पहले जहां राज्य में 15 करोड़ से ज्यादा मतदाता दर्ज थे, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 12 करोड़ 55 लाख रह गई है। इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने रखे आधिकारिक आंकड़े
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी सभी राजनीतिक दलों को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि करीब 18 प्रतिशत मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए। आयोग के अनुसार 81.30 प्रतिशत मतदाताओं ने खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए फॉर्म भरकर सत्यापन कराया, जबकि शेष मतदाता प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके।
क्यों कटे इतने ज्यादा नाम, सामने आए कारण
निर्वाचन आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों के पीछे कई वजहें हैं। 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए। करीब 2.17 करोड़ मतदाता या तो अनुपस्थित मिले या स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे। इसके अलावा 25.47 लाख मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इन्हीं कारणों से कुल 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए।
पोलिंग स्टेशन को लेकर भी बदले नियम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे, जबकि पहले यह संख्या करीब 1500 तक थी। इसी वजह से कई नए पोलिंग स्टेशन बनाए गए। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगा, जिसके कारण ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन पहले तीन बार टालना पड़ा।
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नाम कटने पर मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं है। जिन मतदाताओं का नाम इसमें नहीं है, उन्हें पूरा मौका दिया जाएगा। 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक नागरिक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर नाम जोड़ा या सुधारा जा सकता है।
कब आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
आयोग के अनुसार सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इसके बाद 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। चुनाव आयोग ने 18 साल पूरे कर चुके नए मतदाताओं से भी अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांचें और जरूरत पड़ने पर फॉर्म-6 या फॉर्म-8 भरें।