UP Weather Update : उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है. बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव (लो प्रेशर) सिस्टम और उससे जुड़े मजबूत मानसूनी प्रवाह का असर अब प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 20, 21 और 22 जुलाई के दौरान पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हल्की से लेकर भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश और तेज हवाएं भी चल सकती हैं.
गोंडा से नोएडा तक बारिश का असर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार गोंडा, बहराइच, अयोध्या, बलरामपुर, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भारी बारिश के आसार बने हुए हैं। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी रुक-रुक कर तेज वर्षा दर्ज की जा सकती है। कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
तीन दिन लगातार बारिश की संभावना
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी द्रोणी और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। कई स्थानों पर एक से अधिक दौर की बारिश देखने को मिल सकती है। कहीं-कहीं भारी वर्षा के कारण जलभराव की स्थिति भी बन सकती है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों और निचले इलाकों में लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी.
किसानों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता भी जरूरी
लगातार हो रही बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक मानी जा रही है। धान, मक्का और अन्य फसलों को पर्याप्त नमी मिलने से खेती को फायदा मिल सकता है. हालांकि जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होगी, वहां खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहेगी। कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम की ताजा जानकारी के अनुसार खेतों का प्रबंधन करने की सलाह दे रहे हैं.
लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली चमकने के समय खुले स्थानों में न रुकने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है। तेज बारिश के दौरान यातायात प्रभावित हो सकता है, इसलिए यात्रा से पहले मौसम का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.