वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन चुनौती के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सलाह दी है। मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने ऊर्जा बचत और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सरकारी और निजी दोनों स्तर पर ईंधन बचत को प्राथमिकता देना जरूरी है।
काफिलों में होगी कटौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों में 50 फीसदी तक कटौती करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही सरकारी विभागों को अनावश्यक वाहन उपयोग रोकने और साझा परिवहन व्यवस्था अपनाने के लिए भी कहा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर ही सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाए।
वर्क फ्रॉम होम पर जोर
सरकार ने बड़े कार्यालयों और भीड़भाड़ वाले कार्यस्थलों पर हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम मॉडल लागू करने की सिफारिश की है। खासतौर पर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में स्थित आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रियल यूनिट्स को इस दिशा में कदम बढ़ाने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों में हाइब्रिड मॉडल अपनाकर ट्रैफिक और ईंधन दोनों की बचत की जा सकती है। सरकार इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।
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वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा
योगी सरकार ने सरकारी बैठकों और सेमिनारों को भी ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया है। शिक्षा विभाग की कार्यशालाओं और अन्य विभागीय बैठकों को वर्चुअल मोड में करने की सलाह दी गई है। राज्य सचिवालय और निदेशालय स्तर पर होने वाली आधी आंतरिक बैठकों को भी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा कम होगी और ऊर्जा की बड़ी बचत संभव हो सकेगी। डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी फोकस बढ़ाया जा रहा है।
नो-व्हीकल डे की तैयारी
सरकार आम जनता को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सप्ताह में एक दिन ‘नो-व्हीकल डे’ मनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस अभियान में सरकारी कर्मचारी, छात्र और आम नागरिकों को शामिल करने की योजना बनाई गई है। लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील की जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी और ईंधन की बचत भी होगी।
कारपूलिंग और ईवी पर फोकस
योगी सरकार ने कंपनियों को कर्मचारियों के लिए कारपूलिंग व्यवस्था शुरू करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और सार्वजनिक परिवहन के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच संसाधनों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश में ऊर्जा बचत और ईंधन नियंत्रण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया जा रहा है।