
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से ऐसी खबर आई जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया. चुनार रेलवे स्टेशन पर कालका एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. ये हादसा सुबह करीब 9:30 बजे उस वक्त हुआ जब कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए गंगा जाने वाले श्रद्धालु ट्रेन से उतर रहे थे. रेलवे ने 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मृतकों की संख्या इससे अधिक हो सकती है. स्टेशन पर मचा चीख-पुकार का माहौल, हर तरफ अफरा-तफरी और रेल ट्रैक पर बिखरे शवों का मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप उठी.
कैसे हुआ हादसा ?
घटना चुनार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 की है. चोपन से आई पैसेंजर ट्रेन जब स्टेशन पर पहुंची तो भारी भीड़ के चलते कई श्रद्धालु प्लेटफॉर्म पर न उतरकर दूसरी तरफ ट्रैक पर उतर गए. ठीक उसी समय दूसरे ट्रैक से तेज रफ्तार में कालका एक्सप्रेस आ गई. इस ट्रेन का इस स्टेशन पर कोई स्टॉपेज नहीं था, इसलिए रफ्तार काफी तेज थी. श्रद्धालु कुछ समझ पाते, इससे पहले ही 7 से 8 लोग ट्रेन की चपेट में आ गए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतनी तेजी से हुआ कि किसी को बचने का मौका तक नहीं मिला. जब ट्रेन गुजर गई, तब रेलवे ट्रैक पर सिर्फ लाशें और चीथड़े बिखरे नजर आए.
गंगा स्नान के लिए जा रही थीं महिलाएं
हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर श्रद्धालु महिलाएं थीं, जो कार्तिक पूर्णिमा के पावन स्नान के लिए बालू घाट जा रही थीं. ये स्थान चुनार स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर है. श्रद्धालु समूहों में निकले थे, परंतु ट्रेन की अचानक रफ्तार ने सबकुछ पल भर में खत्म कर दिया. घटना के बाद मौके पर कोहराम मच गया. कुछ लोग बेहोश होकर गिर पड़े तो कई अपने प्रियजनों के शव पहचानते हुए विलाप करने लगे. स्टेशन पर तैनात पुलिस और आरपीएफ ने किसी तरह भीड़ को नियंत्रित किया. शवों को बैग में भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया. मौके पर पहुंची टीम ने बताया कि सभी मृतकों की पहचान कर ली गई है.
सीएम योगी ने लिया संज्ञान
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य के निर्देश दिए हैं. वहीं स्थानीय लोग रेलवे प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि जब स्टेशन पर भीड़ थी, तो कालका एक्सप्रेस को धीमी गति से क्यों नहीं निकाला गया? रेलवे के अफसरों ने बताया कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. गंगा मेले के कारण स्टेशन पर भारी भीड़ थी और श्रद्धालु स्नान के लिए जा रहे थे. लेकिन अब ये खुशी का सफर मातम में बदल गया. मिर्जापुर के इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे रेलवे सिस्टम में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतज़ाम वाकई पर्याप्त हैं?