UPI Charges Debate : यूपीआई आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक लोग कुछ सेकंड में भुगतान कर देते हैं। लेकिन अब यूपीआई की लागत और इसे लंबे समय तक मुफ्त रखने को लेकर बहस तेज हो गई है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने भी कहा है कि यूपीआई को हमेशा मुफ्त रखना संभव नहीं हो सकता।
यूपीआई पर क्यों उठ रहा है सवाल
यूपीआई से हर दिन करोड़ों लेनदेन होते हैं। इसे चलाने के लिए बैंक, भुगतान कंपनियां और तकनीकी व्यवस्था लगातार काम करती हैं। ऐसे में लेनदेन बढ़ने के साथ इसका खर्च भी बढ़ रहा है। सरकार अभी यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद देती है, लेकिन यह सवाल उठ रहा है कि आगे चलकर इतने बड़े नेटवर्क का खर्च कैसे पूरा होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
सरकार की ओर से यूपीआई लेनदेन के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है। वहीं, उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक यूपीआई व्यवस्था को चलाने की लागत इससे कई गुना ज्यादा है। इसी वजह से लंबे समय तक सरकारी मदद पर निर्भर रहना आसान नहीं माना जा रहा है।
क्या आम लोगों से पैसे लिए जाएंगे
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा। फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। सरकार ने साफ किया है कि आम लोगों के सामान्य यूपीआई भुगतान को शुल्क से बाहर रखने की बात कही गई है। संभावित शुल्क की चर्चा मुख्य रूप से कुछ बड़े व्यापारिक लेनदेन को लेकर है।
बड़े लेनदेन पर लग सकता है शुल्क
सरकार यूपीआई को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें बड़े मूल्य वाले व्यापारिक लेनदेन पर मामूली शुल्क लगाने का विकल्प भी शामिल है। इसके अलावा सरकारी मदद को धीरे-धीरे कम करने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी यह अंतिम फैसला नहीं है।
इसे भी पढ़ें : माधुरी दीक्षित के घुंघराले बालों का अंदाज आज भी है खास, आप भी ऐसे पा सकती हैं खूबसूरत लुक
यूपीआई का भविष्य कैसा होगा
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को बहुत आसान बना दिया है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह है कि इसकी सुविधा भी बनी रहे और इसे चलाने का खर्च भी पूरा हो। आने वाले समय में अगर कोई बदलाव होता है तो उसका असर मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक लेनदेन पर पड़ने की संभावना है। आम यूजर के लिए यूपीआई को आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क के रखने पर ही फिलहाल जोर दिखाई दे रहा है।