भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। मई 2026 में यूपीआई के जरिए हुए लेनदेन ने नया रिकॉर्ड कायम किया। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, महीने भर में करीब 29.90 लाख करोड़ रुपये का भुगतान यूपीआई के माध्यम से किया गया। यह आंकड़ा देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
एक साल में 19 फीसदी की बढ़ोतरी
मई 2026 के आंकड़े पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं अप्रैल 2026 के मुकाबले भी इसमें करीब 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लेनदेन की संख्या के लिहाज से भी यूपीआई ने नया मुकाम हासिल किया। मई में कुल 23.2 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जबकि अप्रैल में यह संख्या 22.35 अरब थी। लगातार बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि लोग अब रोजमर्रा के भुगतान के लिए यूपीआई पर पहले से ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।
छोटे से बड़े भुगतान तक हर जगह यूपीआई
यूपीआई की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी सरलता और सुविधा है। आज चाय की दुकान, सब्जी मंडी, किराना स्टोर, ऑटो-रिक्शा, रेस्तरां और बड़े शॉपिंग मॉल तक हर जगह क्यूआर कोड आधारित भुगतान आम हो चुका है। स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और फीचर फोन में भी डिजिटल भुगतान सुविधाओं के विस्तार ने इसे और अधिक लोकप्रिय बनाया है। यही वजह है कि नकदी की जगह मोबाइल से भुगतान करना लोगों की आदत बनता जा रहा है।
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छोटे ट्रांजेक्शन ने बढ़ाई रफ्तार
भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार यूपीआई का औसत टिकट साइज लगातार घटा है। वर्ष 2021 में प्रति लेनदेन औसत राशि 1,848 रुपये थी, जो 2025 तक घटकर 1,313 रुपये रह गई। इसका अर्थ है कि लोग अब केवल बड़े भुगतान ही नहीं, बल्कि चाय, नाश्ता, सब्जी और अन्य छोटी खरीदारी के लिए भी डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यूपीआई का उपयोग पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गया है।
भारत की डिजिटल क्रांति का मजबूत आधार
यूपीआई के संचालन और विकास के पीछे एनपीसीआई की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की पहल से स्थापित यह संस्था देश में रियल-टाइम भुगतान प्रणाली को संचालित करती है। तेज, सुरक्षित और आसान भुगतान व्यवस्था ने यूपीआई को भारत की डिजिटल क्रांति का प्रमुख आधार बना दिया है। बढ़ते आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में डिजिटल भुगतान का यह सफर और भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।