एक दौर था जब भुगतान का मतलब सिर्फ नकदी होता था। फिर डेबिट और क्रेडिट कार्ड का चलन बढ़ा, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। मोबाइल फोन और क्यूआर कोड के जरिए होने वाला यूपीआई पेमेंट देश में सबसे पसंदीदा माध्यम बन गया है। एक ताजा स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी तक पहुंच गई है। डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या बीते वर्षों में लगभग 11 गुना बढ़ी है, जो इस बदलाव की रफ्तार को दिखाती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकों की बढ़ती भागीदारी
वित्तीय सेवाओं से जुड़ी रिपोर्ट बताती है कि यूपीआई क्यूआर कोड का दायरा 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे छोटे-बड़े व्यापारी आसानी से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर पा रहे हैं। मार्च 2021 में जहां 216 बैंक यूपीआई प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 661 हो गई है। थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर की संख्या भी 16 से बढ़कर 38 हो चुकी है, जिससे पूरा डिजिटल इकोसिस्टम और मजबूत हुआ है।
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युवाओं की पसंद बना यूपीआई
देश में डिजिटल भुगतान को लोकप्रिय बनाने में युवाओं की अहम भूमिका रही है। 18 से 25 वर्ष के आयु वर्ग में यूपीआई का उपयोग 66 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। स्टडी के अनुसार 65 प्रतिशत उपयोगकर्ता दिन में कई बार डिजिटल लेन-देन करते हैं। कुल भुगतान लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत है, जो नकदी के 38 प्रतिशत हिस्से से कहीं आगे निकल चुकी है।
व्यापारियों और उपभोक्ताओं का बढ़ा भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक यूपीआई और रुपे कार्ड के इस्तेमाल से 90 प्रतिशत लोगों का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा है। 52 प्रतिशत लोगों ने कैशबैक को एक आकर्षण बताया, जबकि 74 प्रतिशत ने भुगतान की गति को सबसे बड़ा फायदा माना। 94 प्रतिशत छोटे व्यापारी यूपीआई अपना चुके हैं और 57 प्रतिशत व्यापारियों ने बिक्री में बढ़ोतरी की बात कही है।