UPI Fees Rule : UPI पेमेंट को लेकर इन दिनों नई चर्चा शुरू हो गई है। वजह है संसद में पेश किया गया 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल'। इस बिल में ऐसा प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्य में सरकार जरूरत पड़ने पर UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की कानूनी अनुमति दे सकती है। हालांकि अभी कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है।
MDR क्या होता है और कौन देता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो किसी डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने पर दुकानदार अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह चार्ज सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता। हालांकि कई बार व्यापारी इस लागत को सामान की कीमत में जोड़ सकते हैं, जिससे ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
क्या हर UPI पेमेंट पर फीस लगेगी?
फिलहाल ऐसा नहीं है। चर्चा सिर्फ ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन को लेकर है। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले सामान्य UPI ट्रांजैक्शन इस दायरे में नहीं होंगे। रोजमर्रा की छोटी खरीदारी, जैसे दूध, सब्जी, किराना, चाय, ऑटो या रेस्टोरेंट का भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
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अगर भविष्य में नियम लागू हुआ तो क्या असर होगा?
यदि सरकार भविष्य में MDR लागू करती है, तो इसका असर मुख्य रूप से महंगे सामान, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, ज्वेलरी या बड़े बिल वाले बिजनेस पेमेंट पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंकों और पेमेंट कंपनियों को अतिरिक्त आय मिलेगी, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाया जा सकेगा। दूसरी ओर, कुछ व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।
अभी लोगों को क्या करना चाहिए?
फिलहाल आम लोगों के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकार ने अभी केवल भविष्य में नियम बनाने का विकल्प रखा है। UPI पहले की तरह मुफ्त है और किसी भी तरह का नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। यदि भविष्य में MDR लागू करने का फैसला होता है, तो सरकार अलग से इसकी आधिकारिक घोषणा और विस्तृत नियम जारी करेगी।