UPI MDR : UPI पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने की चर्चा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस चार्ज का फायदा किसे मिलेगा। कई लोग मान रहे हैं कि PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी ऐप्स सबसे ज्यादा कमाई करेंगी। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इससे बैंकों की बल्ले-बल्ले होने वाली है। अब इसी गणित को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
MDR आखिर होता क्या है?
MDR वह शुल्क है जो किसी डिजिटल पेमेंट पर दुकानदार देता है। मान लीजिए आपने किसी दुकान पर 5,000 रुपये का सामान खरीदा और UPI से भुगतान किया। अगर उस पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होता है तो 20 रुपये का चार्ज बनेगा। यह रकम ग्राहक नहीं बल्कि दुकानदार देगा। इसके बाद यही पैसा डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों में बांटा जाएगा।
किसे मिलेगा सबसे बड़ा हिस्सा?
यहीं से असली खेल शुरू होता है। उदाहरण के तौर पर 75,000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपये MDR बनता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उस बैंक को मिलता है जिसके खाते से पैसा कटता है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत हिस्सा यानी 120 रुपये ग्राहक वाले बैंक के पास जा सकता है। वहीं व्यापारी के बैंक को लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा मिल सकता है। इसके बाद प्रोसेसिंग बैंक और पेमेंट ऐप्स के बीच बाकी रकम बंटती है।
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क्या ऐप्स की होगी चांदी?
पहली नजर में लगता है कि PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी ऐप्स सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगी क्योंकि ज्यादातर UPI भुगतान इन्हीं प्लेटफॉर्म्स से होते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ऐप्स को कुल MDR का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। यानी कमाई जरूर बढ़ेगी, लेकिन सबसे बड़ा फायदा उनके हिस्से में नहीं जाएगा। MDR से इन कंपनियों को एक स्थायी कमाई का रास्ता जरूर मिलेगा।
बैंकों की क्यों लग सकती है लॉटरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि MDR का सबसे बड़ा लाभ बैंकों को मिल सकता है। अगर कुल संभावित रेवेन्यू 16,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक पहुंचता है, तो उसका बड़ा हिस्सा बैंकों के पास जा सकता है। जिन बैंकों के पास ज्यादा ग्राहक, ज्यादा बचत खाते और ज्यादा UPI यूजर हैं, उन्हें सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है। इसी वजह से SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, HDFC बैंक और दूसरे बड़े बैंक इस बदलाव के प्रमुख लाभार्थी माने जा रहे हैं।
सरकार और सिस्टम को क्या मिलेगा?
इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ कमाई नहीं बताया जा रहा। NPCI के अनुसार कुल MDR कलेक्शन का एक हिस्सा डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए अलग फंड में भी जाएगा। इसका इस्तेमाल छोटे कारोबारियों को UPI से जोड़ने, तकनीक सुधारने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और पूरे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को मजबूत बनाने में किया जा सकता है। यानी इस नए मॉडल में ऐप्स को कमाई मिलेगी, लेकिन सबसे बड़ा फायदा बैंकों को होता दिख रहा है।