UPI MDR Fees : UPI भुगतान पर नई शुल्क व्यवस्था लागू होने से पहले बहस तेज हो गई है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार से अपील की है कि UPI लेनदेन को कुछ और वर्षों तक शुल्क-मुक्त रखा जाए। उनका कहना है कि अगर डिजिटल भुगतान पर थोड़ी भी फीस लगाई गई तो कुछ उपयोगकर्ता दोबारा नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर MDR लागू होने जा रहा है।
जीरो फीस जारी रखने की मांग
राजीव कुमार ने कहा कि सरकार को किसी भी राशि के UPI व्यापारी भुगतान पर शुल्क नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने UPI को ‘जनहित सेवा’ के रूप में देखने की बात कही और कहा कि इसके व्यापक फायदे इसके बुनियादी ढांचे को बनाए रखने की लागत से ज्यादा हैं। उनके अनुसार, UPI व्यवस्था पर सरकारी खजाने से करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन डिजिटल भुगतान से मिलने वाले व्यापक आर्थिक फायदे इससे अधिक हैं।
कैश की ओर लौटने का खतरा
कुमार ने बताया कि संख्या के हिसाब से करीब 96 फीसदी UPI लेनदेन 2,000 रुपये से कम के होते हैं, जबकि मूल्य के हिसाब से करीब 66 फीसदी लेनदेन इस सीमा से ऊपर हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में शुल्क लागू होने से कुछ भुगतान नकद में वापस जाने का जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने सरकार से फिलहाल मौजूदा व्यवस्था जारी रखने की अपील की है।
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15 अक्टूबर से लागू होगा MDR
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M UPI लेनदेन पर 2,000 रुपये से अधिक की राशि के लिए 0.40 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान भी राशि की परवाह किए बिना शुल्क-मुक्त रहेंगे।
जरूरी सेवाओं पर पांच रुपये शुल्क
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी सामान जैसे आवश्यक तथा कम मुनाफे वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर इन क्षेत्रों में प्रतिशत आधारित MDR के बजाय 5 रुपये का निश्चित शुल्क लागू होगा। वहीं छोटे व्यापारी, जो UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक भुगतान प्राप्त करते हैं, शून्य MDR वाली श्रेणी में रहेंगे। सरकार के अनुसार, करीब 96 फीसदी P2M लेनदेन नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
फीस ग्राहक से लेने की अनुमति नहीं
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है और इसे UPI भुगतान करने वाले ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। सरकार के अनुसार, ग्राहकों के लिए UPI का मुफ्त इस्तेमाल जारी रहेगा और कोई मासिक कोटा या लेनदेन की संख्या संबंधी सीमा नहीं होगी। इस बीच शुल्क व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है। विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया है, जबकि सरकार ने कहा है कि आम उपयोगकर्ताओं पर इसका सीधा शुल्क नहीं डाला जाएगा।