UPI MDR : UPI भुगतान को लेकर प्रस्तावित MDR व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल सिर्फ शुल्क लगने का नहीं, बल्कि यह भी है कि इससे मिलने वाली रकम किन-किन हिस्सेदारों के बीच बांटी जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MDR की राशि चार हिस्सों में बांटे जाने का प्रस्ताव है। इसमें ग्राहक के बैंक से लेकर दुकानदार के बैंक और UPI ऐप तक शामिल हैं।
ग्राहक के बैंक को मिलेगा बड़ा हिस्सा
MDR की कुल रकम में सबसे बड़ा हिस्सा उस बैंक को मिलेगा, जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। इसे इश्यूअर बैंक कहा जाता है। प्रस्तावित बंटवारे के अनुसार, कुल MDR का 40 प्रतिशत हिस्सा इश्यूअर बैंक को मिलेगा। यानी भुगतान की प्रक्रिया में ग्राहक के बैंक की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रखी गई है।
दुकानदार के बैंक को 30 प्रतिशत
MDR की रकम का अगला बड़ा हिस्सा दुकानदार या कारोबारी के बैंक को दिया जाएगा। जिस बैंक के जरिए व्यापारी का भुगतान प्राप्त और संसाधित होता है, उसे मर्चेंट एक्वायरर कहा जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था में कुल MDR का 30 प्रतिशत हिस्सा इसी बैंक को मिलने की बात कही गई है। इससे भुगतान प्रक्रिया में व्यापारी के बैंक की भी अहम भूमिका बनी रहती है।
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UPI ऐप्स को मिलेगा 20 प्रतिशत
ग्राहक जिस UPI ऐप के जरिए भुगतान करता है, उसे भी MDR की रकम में हिस्सा मिलेगा। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे तीसरे पक्ष के UPI ऐप इस श्रेणी में आते हैं। प्रस्तावित बंटवारे के मुताबिक, कुल MDR का 20 प्रतिशत हिस्सा इन ऐप्स को दिया जाएगा। यानी डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाले ऐप भी इस शुल्क व्यवस्था में हिस्सेदार होंगे।
सहयोगी बैंक को मिलेगा 10 प्रतिशत
UPI ऐप को बैंकिंग और तकनीकी सहायता देने वाले सहयोगी या प्रायोजक बैंक को MDR का बाकी 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। इस तरह पूरी रकम का 100 प्रतिशत चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है। इसमें 40 प्रतिशत इश्यूअर बैंक, 30 प्रतिशत मर्चेंट एक्वायरर, 20 प्रतिशत UPI ऐप और 10 प्रतिशत सहयोगी बैंक के हिस्से में जाएगा।
10 हजार के भुगतान से समझें
मान लीजिए 10,000 रुपये के भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR लागू होता है। ऐसे में कुल शुल्क 40 रुपये बनेगा। इसमें 40 प्रतिशत यानी 16 रुपये ग्राहक के बैंक को मिलेंगे। दुकानदार के बैंक को 30 प्रतिशत के हिसाब से 12 रुपये मिलेंगे। UPI ऐप को 20 प्रतिशत यानी 8 रुपये और सहयोगी बैंक को 10 प्रतिशत यानी 4 रुपये मिलेंगे। इस गणना के अनुसार MDR की रकम में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ग्राहक के बैंक की होगी, जबकि सबसे छोटी हिस्सेदारी सहयोगी बैंक को मिलेगी।