UPI MDR Charges Proposal : देश में डिजिटल पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक लोग QR कोड स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं। लेकिन इस व्यवस्था को चलाने वाले बैंकों और पेमेंट कंपनियों के खर्च की भरपाई कैसे होगी, इस पर नई बहस शुरू हो गई है। IIT बॉम्बे की एक स्टडी में चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को 0.40 फीसदी से घटाकर 0.08 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, यह केवल अध्ययन की सिफारिश है, लागू हो चुका नया नियम नहीं।
MDR में कटौती का सुझाव
‘UPI at a Crossroads: Reintroducing the MDR’ नाम की स्टडी में डिजिटल पेमेंट से जुड़े खर्च को पूरा करने के लिए शुल्क व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। इसके मुताबिक, कुल 0.08 फीसदी MDR में से 0.06 फीसदी हिस्सा थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स, जैसे PhonePe और Google Pay, को देने का सुझाव है। वहीं, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, जिनमें मुख्य रूप से बैंक शामिल हैं, को 0.02 फीसदी हिस्सा देने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य UPI व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच खर्च और आय का बंटवारा तय करना है।
बैंकों की कमाई से चलेगा सिस्टम
स्टडी में बैंकों के करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट यानी CASA डिपॉजिट से होने वाली कमाई का इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करने का सुझाव भी दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में CASA डिपॉजिट से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 4.85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। अध्ययन में इस रकम का करीब 3 फीसदी, यानी लगभग 15,000 करोड़ रुपये, UPI सिस्टम के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे के खर्च को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।
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बड़े कारोबारियों पर भी नजर
स्टडी में सालाना 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए UPI पेमेंट स्वीकार करना अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ऑनलाइन मर्चेंट पेमेंट पर उचित डिजिटल पेमेंट फीस लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। अध्ययन में ट्रांजैक्शन की रकम के अनुपात में शुल्क तय करने और अधिकतम 40 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा रखने की बात कही गई है। हालांकि, इन सुझावों को लागू करने के लिए सरकार और संबंधित नियामकों का फैसला जरूरी होगा।
क्या आम लोगों को देना होगा चार्ज?
UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पैसे भेजने या दुकानों पर QR कोड से भुगतान करने पर शुल्क लगेगा। स्टडी में रोजमर्रा के पर्सन-टू-पर्सन भुगतान पर सीधे शुल्क लगाने की सिफारिश नहीं की गई है। इसमें मुख्य रूप से मर्चेंट ट्रांजैक्शन और सिस्टम के खर्च की भरपाई पर चर्चा की गई है। इसलिए इस प्रस्ताव को सभी UPI भुगतान पर चार्ज लगने के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नए नियमों पर अभी फैसला बाकी
पेमेंट इंडस्ट्री में अलग-अलग प्रकार के लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर कई सवाल हैं। यूटिलिटी बिल, लोन रिपेमेंट और कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान के नियम और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री के कुछ पक्षों ने नियमों को समझने और तकनीकी तैयारी के लिए समयसीमा जनवरी 2027 तक बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल MDR में बदलाव का सुझाव चर्चा का विषय है। किसी नए शुल्क या नियम को लागू मानने से पहले सरकार या संबंधित नियामक की आधिकारिक घोषणा देखना जरूरी होगा।