मध्य प्रदेश सरकार अब शहरों की हवा को शुद्ध करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के हर नगर में ‘नगर वन’ तैयार किए जाएंगे, जो शहरों के ‘लंग्स’ यानी फेफड़ों की तरह काम करेंगे। नगरीय विकास विभाग ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिलने वाली है। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक प्रदेश के हर शहर को ऑक्सीजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
हर शहर बनाएगा अपना ऑक्सीजन बैंक
राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित सभी नगरों में सरकारी खाली भूमि और वन क्षेत्र पर ‘नगर वन’ विकसित किए जाएंगे। इन वनों को स्थानीय नगरीय निकायों की जिम्मेदारी में रखा जाएगा। पौधों की देखभाल, रखरखाव और उनकी जीवितता के आधार पर ही फंड जारी किए जाएंगे।
500 करोड़ की योजना को मिलेगी कैबिनेट मंजूरी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने ‘मुख्यमंत्री नगर वन विकास योजना’ के लिए 500 करोड़ रुपए का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस राशि को तीन किस्तों में नगर निगमों को दिया जाएगा — पहली किस्त 60% और बाकी दो किस्तें 20-20% के अनुपात में। योजना को मंजूरी मिलने के बाद इसका क्रियान्वयन शुरू होगा।
वायु प्रदूषण से राहत की उम्मीद
राज्य के 29 शहरों में 2024-25 के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सुधरने की बजाय और बिगड़ गया है। इसमें इंदौर जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर लगातार बढ़ रहे हैं। नगर वन योजना से न केवल ग्रीन कवर बढ़ेगा बल्कि शहरों की आबोहवा भी धीरे-धीरे सुधरेगी।
ग्रीन सेल करेंगे निगरानी और रखरखाव
हर निकाय में ‘ग्रीन सेल’ बनाए जाएंगे, जिनमें प्रशिक्षित कर्मचारी पौधारोपण और संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे। इन अधिकारियों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाएगा कि कौन-से पौधे स्थानीय पर्यावरण के लिए उपयुक्त हैं और उनकी देखरेख कैसे की जाए।
2030 तक हर शहर बनेगा ग्रीन ज़ोन
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक मध्य प्रदेश के सभी नगर अपने स्तर पर ऑक्सीजन उत्पादन करने लगें। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि शहरी जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।