दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी कहे जाने वाले अमेरिका में इस समय एक अलग तरह का संकट दिख रहा है। वहां मवेशियों और बछड़ों की संख्या तेजी से घट गई है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक देश में अब सिर्फ 8.5 करोड़ मवेशी और बछड़े बचे हैं। यह आंकड़ा 1951 के बाद सबसे कम है। यानी करीब 75 साल में पहली बार इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
पहले कितने थे, अब कितने बचे?
अगर पुराने आंकड़े देखें तो साल 1975 में अमेरिका में मवेशियों की संख्या करीब 13 करोड़ थी। उस समय यह अपने चरम पर थी। अब यह संख्या लगभग 4.5 करोड़ कम हो चुकी है। सिर्फ 2020 से अब तक ही करीब 1 करोड़ की गिरावट आई है। यानी कुछ ही सालों में हालात तेजी से बदले हैं।
बीफ की कीमत क्यों बढ़ी?
मवेशियों की कमी का सीधा असर बीफ की कीमतों पर पड़ा है। पिछले साल जनवरी की तुलना में बीफ और बछड़ों के मांस की कीमत करीब 15 फीसदी बढ़ चुकी है। यह खाने-पीने की चीजों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है। वहीं चिकन की कीमत सिर्फ 1.1 फीसदी बढ़ी है और दूध की कीमत लगभग स्थिर है। यानी संकट का असर सबसे ज्यादा बीफ बाजार पर दिख रहा है।
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राहत जल्दी क्यों नहीं मिलेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान अभी से मवेशियों की संख्या बढ़ाने की कोशिश भी करें, तो नई खेप बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा। अनुमान है कि 2028 से पहले हालात सामान्य होना मुश्किल है। पशुपालन एक लंबी प्रक्रिया है, इसलिए अचानक उत्पादन बढ़ाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि फिलहाल कीमतों में जल्द राहत की उम्मीद कम है।
अमेरिका में बीफ की खपत कितनी?
अमेरिका में प्रति व्यक्ति बीफ की खपत करीब 58.1 पौंड सालाना है। हालांकि 1970 के दशक में यह 80 पौंड से ज्यादा थी। समय के साथ खपत में कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े बीफ उपभोक्ताओं में शामिल है। ऐसे में उत्पादन घटने से बाजार पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि टैरिफ से देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और ट्रेड घाटा कम हुआ है। लेकिन खाद्य क्षेत्र में यह गिरावट नई चुनौती बन सकती है। अगर मांस महंगा होता रहा, तो आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी में यह बदलाव आगे क्या रूप लेगा, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।