अमेरिका इस समय जिस आर्थिक हालात से गुजर रहा है, वह चौंकाने वाला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका की संघीय सरकार का कर्ज 38.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि देश के हर परिवार पर औसतन 2 लाख 85 हजार डॉलर से ज्यादा का कर्ज बैठता है। पिछले एक साल में ही सरकारी कर्ज में करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, यानी रोजाना लगभग 6.3 अरब डॉलर का कर्ज बढ़ा। अगर यही रफ्तार बनी रही तो अगस्त तक यह आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर के पार जा सकता है। साल 2020 के बाद से अब तक कर्ज में 15 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो यह बताने के लिए काफी है कि समस्या कितनी गहरी हो चुकी है।
टैरिफ और दबाव की राजनीति
देश के बढ़ते कर्ज को काबू में करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त कदम उठाए। भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए गए, ताकि अमेरिका के राजस्व में इजाफा हो सके। इसके साथ ही कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अमेरिका में निवेश के लिए मजबूर किया गया। टेक्नोलॉजी और चिप सेक्टर की कंपनियों से लेकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तक, सभी पर दबाव बनाया गया कि वे अपना कारोबार अमेरिका में बढ़ाएं। इतना ही नहीं, सेमीकंडक्टर कंपनियों से चीन को निर्यात के बदले कमाई का हिस्सा मांगने जैसे फैसले भी लिए गए। कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए “ड्रिल बेबी ड्रिल” जैसे नारों के साथ घरेलू संसाधनों के अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
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ब्याज में ही उड़ रहा बजट
इन तमाम कोशिशों के बावजूद अमेरिकी सरकारी खजाने पर कर्ज का बोझ कम नहीं हुआ। विशेषज्ञ संस्थानों के अनुसार, साल 2024 में अमेरिका ने सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में करीब 880 अरब डॉलर खर्च किए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अनुमान है कि मौजूदा साल में यह खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अमेरिका में करीब 12.8 करोड़ परिवार हैं, यानी हर परिवार को औसतन हर महीने लगभग 650 डॉलर सिर्फ ब्याज के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। यह स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है, क्योंकि विकास पर खर्च होने वाला पैसा धीरे-धीरे ब्याज में ही खपता जा रहा है।
दूसरे देशों पर टिकी नजर
कर्ज के इस पहाड़ ने अमेरिका की वैश्विक रणनीति को भी प्रभावित किया है। जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि अब अमेरिका की नजर दूसरे देशों के बाजारों और संसाधनों पर ज्यादा टिकी है। टैरिफ, व्यापार शर्तें और निवेश के दबाव इसी रणनीति का हिस्सा हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर दूसरे देशों से ज्यादा राजस्व और संसाधन हासिल किए जाएं, तो घरेलू आर्थिक दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि सिर्फ सख्ती और दबाव की नीति से अमेरिका का कर्ज संकट सुलझना आसान नहीं है। बढ़ता कर्ज अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।