मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच Donald Trump के फैसलों का असर अब सीधे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। ईरान के साथ लंबी खिंचती जंग और बढ़ते रक्षा खर्च ने देश को रिकॉर्ड कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राष्ट्रीय कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
युद्ध ने बढ़ाया आर्थिक दबाव
ईरान के साथ शुरू हुआ संघर्ष जितना छोटा समझा गया था, वह अब लंबा और महंगा साबित हो रहा है। लगातार सैन्य ऑपरेशन और रणनीतिक खर्च ने अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध जितना लंबा चलेगा, उतना ही आर्थिक संकट गहराता जाएगा।
ट्रंप के फैसलों पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Joe Kent जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि यह हमला रणनीतिक जरूरत से ज्यादा दबाव की राजनीति का परिणाम था। इसी असहमति के चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया, जिससे सरकार के अंदरूनी मतभेद भी सामने आ गए।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा राष्ट्रीय कर्ज
अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज अब 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा कुछ ही महीनों में तेजी से बढ़ा है—पहले 37 ट्रिलियन, फिर 38 और अब 39 ट्रिलियन डॉलर। यह बढ़ोतरी बताती है कि सरकारी खर्च नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है।
आम नागरिकों पर बढ़ता बोझ
बढ़ते कर्ज का असर अब सीधे आम लोगों पर दिखने लगा है। कार लोन और होम लोन महंगे हो रहे हैं, कंपनियों के पास निवेश के लिए कम पैसा बच रहा है और इसका असर रोजगार व वेतन पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की चीजें और सेवाएं भी महंगी होती जा रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो जल्द ही अमेरिका का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर वित्तीय संकट पैदा कर सकती है। बिना ठोस योजना के बढ़ता उधार देश की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।