
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका दे दिया है. दरअसल अमेरिका ने पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचे जाने से साफ इनकार कर दिया है. जहां एक शहबाज शरीफ और मुनीर अमेरिका की जी- हुजूरी करने से थक नहीं रहे थे. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अमेरिका को रेयर अर्थ मिनरल का खजाना भी सौंप दिया था. मगर ये सब करना जरा भी पाकिस्तान के काम नहीं आया.
पाकिस्तान को कोई नई उन्नत मिसाइल प्रणाली नहीं- अमेरिका
भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास द्वारा शुक्रवार को एक बयान जारी किया गया है. इस बयान में उन मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है. जिनमें ये दावा किया गया था, कि अमेरिका पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचने जा रहा है. दूतावास द्वारा साफ तौर पर कहा गया है कि ये जानकारी गलत व्याख्या पर आधारित है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की नई या उन्नत मिसाइल प्रणाली अमेरिका द्वारा नहीं दी जा रही है.
अमेरिकी दूतावास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया
अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी ‘डिपार्टमेंट ऑफ वार’ (जो मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट की सार्वजनिक सूची जारी करता है) ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी साझा की थी. उस सूची में पाकिस्तान से जुड़ा एक विदेशी मिलिट्री बिक्री कॉन्ट्रैक्ट संशोधन भी शामिल था, लेकिन उस कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति था. दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘यह कॉन्ट्रैक्ट किसी नई मिसाइल डिलीवरी या पाकिस्तान की मौजूदा हवाई युद्ध क्षमता को अपग्रेड करने से जुड़ा हुआ नहीं है. सस्टेनमेंट का मतलब केवल मौजूदा सिस्टम के सपोर्ट से है, अपग्रेड से नहीं है.’
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पाकिस्तान को नहीं मिलेंगी नई मिसाइलें
पिछले कई दिनों से कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. रिपोर्ट्स में ये भी बताया जा रहा था कि इससे पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट की क्षमता बढ़ जाएगी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा. वहीं नई मिसाइल सेल की खबरों ने इस धारणा को हवा दे दी थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते फिर से गर्म हो रहे हैं. हालांकि अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी किए गए बयान ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल सिस्टम का रखरखाव, उपकरण अपडेट और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति करना है. इसे किसी भी रूप में पाकिस्तान की हवाई शक्ति बढ़ाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा- अधिकारी
इसके साथ ही अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. जो कि कई देशों के साथ चलते रहते हैं. इसमें हथियार प्रणाली के रखरखाव, परीक्षण, और सप्लाई चेन के सुचारु संचालन से जुड़े तकनीकी अपडेट शामिल किए जाते हैं. बयान में यह भी जोड़ा गया है कि कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन’ शब्द का गलत अर्थ निकालते हुए इसे नए हथियारों की सप्लाई समझ लिया था, जो कि गलत है.