मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के अल धाफरा एयरबेस पर स्थित अमेरिकी हवाई युद्ध केंद्र और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर को निशाना बनाए जाने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए खतरनाक रॉकवेल B-1 लांसर बॉम्बर को ब्रिटेन के एयरबेस पर तैनात कर दिया है।
ब्रिटेन के एयरबेस पर तैनात हुआ अमेरिकी बॉम्बर
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिकी वायुसेना का सुपरसोनिक B-1 लांसर बॉम्बर ब्रिटेन के एयरबेस पर उतर गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की अनुमति के बाद इस रणनीतिक बॉम्बर को वहां तैनात किया गया है। माना जा रहा है कि इससे ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ईरान पर हमले तेज किए जा सकते हैं।
ईरान ने अमेरिका के कई एयरबेस को बनाया निशाना
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक पिछले सात दिनों में मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिका के 14 एयरबेस को निशाना बनाया गया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि इनमें से कई एयरबेस गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उन्हें पूरी तरह ठीक करने में कई साल लग सकते हैं। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।
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अरब देशों में भी बढ़ी बेचैनी
ईरान के हमलों के बाद खाड़ी और अरब देशों में भी हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर अरब लीग ने आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र और सुरक्षा व्यवस्था को भी अलर्ट पर रखा है, क्योंकि संघर्ष के फैलने की आशंका लगातार बढ़ रही है।
इजरायल ने भी किया बड़ा सैन्य हमला
इजरायल ने भी ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े हमले किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 80 फाइटर जेट्स ने ईरान के कई सैन्य अड्डों पर हमला किया। इन हमलों के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं और हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं।
एविएशन और कंपनियों पर भी असर
बढ़ते संघर्ष का असर नागरिक उड्डयन और कारोबारी गतिविधियों पर भी पड़ने लगा है। एमिरेट्स एयरलाइंस ने दुबई के लिए अपनी कई उड़ानों को अगले आदेश तक रद्द कर दिया है। वहीं ईरान ने इराक में स्थित एक अमेरिकी कंपनी को भी ड्रोन से निशाना बनाया, जिससे इलाके में भारी आग और धुआं फैल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचता है तो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।