अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें अचानक तेजी से बढ़ गई हैं। बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है।
होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ी वजह
इस संकट की सबसे बड़ी वजह ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट मानी जा रही है। यह रास्ता दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद अहम है। यहां बाधा आने से वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट गहरा गया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4.02 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। यह कीमत युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 1 डॉलर ज्यादा है। वहीं डीजल की कीमत भी बढ़कर लगभग 5.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जिससे वाहन चालकों पर सीधा असर पड़ा है।
चार साल बाद सबसे महंगा ईंधन
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका में ईंधन इतना महंगा हुआ है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कीमतों में ऐसा उछाल देखा गया था। अब एक बार फिर वही हालात बनते नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
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क्रूड ऑयल की कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और 114 से 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। चूंकि पेट्रोल-डीजल कच्चे तेल से ही बनते हैं, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर ईंधन के दाम पर पड़ता है।
आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया के कई देशों में महंगाई और बढ़ सकती है और आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी।