
अमेरिका में छह साल बाद एक बार फिर फेडरल सरकार का शटडाउन हो गया है. जिसकी वजह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार संसद से जरूरी फंडिंग मंजूरी नहीं ले पाई, जिसके चलते आधी रात को सरकारी खर्च का प्रवाह रुक गया. जिसके बाद अब किसी को नहीं पता कि हालात कब तक सामान्य हो पाएंगे.
शटडाउन क्या है और क्यों हुआ?
शटडाउन का मतलब होता है कि सरकार की गैर-जरूरी एजेंसियां और सेवाएं अस्थायी रूप से बंद हो जाना. ट्रंप सरकार का स्पेंडिंग बिल सीनेट में पास नहीं हो सका. आधी रात 12:01 बजे से नया वित्त वर्ष शुरू होते ही सरकारी फंडिंग समाप्त हो गई, इस वजह से प्रशासनिक कामकाज रुक गया और कर्मचारियों को मजबूरी में छुट्टी पर भेजा जाने लगा.
सरकारी कर्मचारियों पर पड़ा सीधा असर
इस शटडाउन से लगभग 40 फीसदी सरकारी कर्मचारी प्रभावित होंगे. इसका मतलब है करीब 8 लाख फेडरल कर्मियों को बिना वेतन के अस्थायी छुट्टी पर जाना होगा. वहीं जहां सेना और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों को बिना वेतन काम जारी रखना पड़ेगा. इससे न केवल कर्मचारियों पर बोझ बढ़ेगा बल्कि आम नागरिकों को भी दिक्कतों का सामना करना होगा.
कौन सी सेवाएं रहेंगी बंद, कौन सी रहेंगी जारी?
इस दौरान जरूरी सेवाएं जैसे पुलिस, सीमा सुरक्षा, मेडिकल इमरजेंसी और हवाई यातायात नियंत्रण जारी रहेंगे लेकिन फूड इंस्पेक्शन, स्टूडेंट लोन, केंद्र से चलने वाले स्कूल और फूड असिस्टेंस जैसी योजनाएं सीमित या बंद हो सकती हैं. वहीं एयरलाइंस ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि उड़ानों पर असर पड़ेगा और यात्रियों को देरी झेलनी पड़ सकती है.
अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट
इस शटडाउन को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि ये शटडाउन जितना लंबा खिंचेगा, उसका असर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर उतना ही गंभीर होगा. स्टॉक मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है और आम लोगों के लिए बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं. इसके साथ ही अमेरिका की वैश्विक छवि और निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है.
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शटडाउन टालने की कोशिश हो गई नाकाम
बताया जा रहा है कि आखिरी समय में ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग को सात हफ्ते बढ़ाने का प्रस्ताव सीनेट में रखा था. हालांकि इसके पक्ष में 55 और विपक्ष में 45 वोट पड़े. जबकि बिल को पास कराने के लिए 60 वोट जरूरी थे, जो कि पूरे नहीं हो सके. इसके चलते यह कोशिश नाकाम रही और शटडाउन रोकना संभव नहीं हो सका.
सियासी टकराव बना बड़ी वजह
वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी उनकी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी मांगों को मानने को तैयार नहीं हैं. इसी वजह से उन्होंने स्पेंडिंग बिल को मंजूरी नहीं दी. सीनेट के स्थगित होते ही ट्रंप सरकार के फंड पर ताला लग गया और अमेरिका एक बड़े प्रशासनिक संकट में फंस गया. देखा जाए तो ये शटडाउन केवल प्रशासनिक रुकावट नहीं बल्कि सियासी टकराव का नतीजा भी है. अब देखना होगा कि ट्रंप सरकार और विपक्ष कितनी जल्दी समझौते पर पहुंच पाते हैं, क्योंकि इसमें जितनी देरी होगी, उतना ही इसका असर अमेरिकी जनता और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा.