अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब विदेशी नागरिक अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेंगे। नए नियम के तहत आवेदनकर्ताओं को अपने देश लौटकर ही इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस फैसले का सीधा असर भारतीय छात्रों, H-1B वीजा धारकों और अस्थाई वीजा पर रह रहे लोगों पर पड़ने वाला है।
ग्रीन कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव
यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने नए नियम की घोषणा करते हुए कहा है कि अब अमेरिका में अस्थाई रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए अपने देश वापस लौटना होगा। पहले तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही स्टेटस बदलकर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी कर लेते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर के मुताबिक, केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही किसी को अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की छूट मिल सकती है।
इमिग्रेशन सिस्टम के दुरुपयोग पर सख्ती
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने भी इस फैसले को इमिग्रेशन सिस्टम को “कानून के मुताबिक” चलाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। विभाग का कहना है कि लंबे समय से लोग सिस्टम की कमियों और कानूनी रास्तों का फायदा उठाकर अमेरिका में स्थायी निवास पाने की कोशिश कर रहे थे। नए नियम के तहत अब स्टेटस एडजस्टमेंट को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाएगा। अधिकारियों को हर आवेदन की अलग-अलग और गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
H-1B वीजा और छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर अमेरिका में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों, H-1B वीजा होल्डर्स और टूरिस्ट वीजा पर मौजूद लोगों पर पड़ सकता है। अब तक ये लोग अमेरिका छोड़े बिना ही ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन नए नियम ने उनकी योजनाओं को बड़ा झटका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नौकरी कर रहे पेशेवरों और पढ़ाई पूरी कर रहे छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
भारतीयों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारतीय नागरिक अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने वालों की सूची में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024 में करीब 49,700 भारतीय मूल के लोगों ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के जरिए अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी। ऐसे में नए नियम का असर भारतीय समुदाय पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और टेक सेक्टर में काम कर रहे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं।
इमिग्रेशन प्रक्रिया अब होगी और कठिन
नए पॉलिसी मेमो के बाद अमेरिका में रहकर स्टेटस बदलना अब आसान नहीं रहेगा। हर आवेदन को “असाधारण राहत” के रूप में देखा जाएगा और अधिकारियों को मामलों की बारीकी से जांच करनी होगी। माना जा रहा है कि इससे ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबी और अधिक जटिल हो सकती है। इस फैसले ने उन हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है, जो वर्षों से अमेरिका में स्थायी नागरिकता पाने का इंतजार कर रहे हैं।