ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के तहत कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत एक इराकी बैंक, ईरान से जुड़े ऑफशोर बैंक, दुबई में काम करने वाला एक ईरानी तेल कारोबारी नेटवर्क, हांगकांग की एक फ्रंट कंपनी और क्यूबा के एक सरकारी बैंक को निशाना बनाया गया है।
सभी वित्तीय रास्ते बंद नहीं कर दिए
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, "ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और उसके तथाकथित सहयोगी भी अब उसे नहीं बचा सकते।" उन्होंने कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक ईरानी सरकार के आर्थिक संसाधन खत्म नहीं हो जाते और उसकी सैन्य गतिविधियों को सहारा देने वाले सभी वित्तीय रास्ते बंद नहीं कर दिए जाते।
सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन नेटवर्कों ने मध्य पूर्व और एशिया में शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों के जरिए सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया है। प्रतिबंधित लोगों में सैयद रूहोल्लाह रजावी भी शामिल हैं, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी सरकार के प्रमुख तेल कारोबारियों में से एक बताया है।
सोने और नकदी में बदला
वित्त मंत्रालय के अनुसार, रजावी दुबई में रहते हैं और पहले अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी की ओर से हर महीने लाखों बैरल तेल विदेश भेजने का काम करते थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ऐसे नेटवर्क हांगकांग के रास्ते धन को यूएई और तुर्किये तक पहुंचाते हैं, जहां उसे सोने और नकदी में बदला जाता है। बाद में यह धन 'माहान एयर' की उड़ानों के जरिए ईरान और उसके समर्थक समूहों तक पहुंचाया जाता है।
नागरिक सादेघ बावी पर प्रतिबंध लगाया
'एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड' नाम की हांगकांग स्थित कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आरोप है कि यह कंपनी ईरान के 'शहर बैंक' से जुड़े नेटवर्क के लिए धन के लेन-देन में मदद कर रही थी। इसके अलावा, दुबई में रहने वाले ईरानी-डोमिनिकन नागरिक सादेघ बावी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका का आरोप है कि वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स (आईआरजीसी-क्यूएफ) से जुड़ी गतिविधियों में मदद कर रहे थे।