ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर 4 दिन में तीसरी बार अमेरिकी हमले के बाद भारत ने अमेरिका के कार्यकारी राजदूत जैशने मीक्स को दूसरी बार तलब किया है। विदेश मंत्रालय में 45 मिनट तक चली बैठक में भारत ने कड़ा विरोध जताया।
क्या हुआ ओमान तट पर?
अमेरिकी नौसेना ने ओमान तट के पास MT Matrix नाम के तेल टैंकर पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर दिया। जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और वो डूबने लगा।
अमेरिका का दावा: US नेवी बोली कि जहाज अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा ब्लैकलिस्टेड था। अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की 4 बार कोशिश कर चुका था। 8 जून को इसने सिग्नल डिवाइस बंद कर ओमानी जलसीमा से निकलने की कोशिश की, इसलिए कार्रवाई की गई। भारत की चिंता: जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर थे। ओमान ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को सुरक्षित निकाला। 3 भारतीय अब भी लापता हैं।
भारत ने क्यों किया समन?
दूसरी बार तलब: विदेश मंत्रालय के अपर सचिव ने अमेरिकी राजदूत को बुलाया। 4 दिन में ये तीसरी घटना है जब भारतीय नाविकों वाले जहाज निशाना बने।
पहले भी हुए हमले:
एक हमले में 3 भारतीय नाविक मारे जा चुके हैं। 13 मई को ओमान तट के पास भारतीय झंडे वाला जहाज 'हाजी अली' डूब गया। 14 भारतीय क्रू सुरक्षित बचाए गए। विदेश मंत्रालय बोला,"ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले पोत पर हुआ हमला अस्वीकार्य है। हम इस बात की निंदा करते हैं कि वाणिज्यिक जहाजों व नाविकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है"।
भारत की एडवाइजरी और अमेरिका का जवाब
DG Shipping ने होर्मुज स्ट्रेट, ओमान की खाड़ी में काम करने वाले 18,000 भारतीय नाविकों के लिए नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की। अमेरिका बोला, 'भारत के संपर्क में हैं'। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वो भारत सरकार के सीधे संपर्क में हैं।
विवाद की जड़: होर्मुज में तनाव
ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है। 20% वैश्विक तेल यहीं से गुजरता है। ईरान-अमेरिका जंग के बीच अमेरिका ने नाकेबंदी कर रखी है। आरोप है कि अमेरिका मनमानी कार्रवाई कर रहा है और भारतीय जहाज चपेट में आ रहे हैं। 4 दिन में 3 हमलों के बाद भारत का सब्र जवाब दे गया। 3 भारतीयों की मौत और 24 नाविकों की जान खतरे में पड़ने पर भारत ने दूसरी बार US दूत को तलब किया। भारत ने साफ किया- "व्यावसायिक नौवहन को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक नाविकों को खतरे में डालना पूरी तरह से बर्दाश्त नहीं"।