मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। खबर है कि अमेरिकी सेना 22 फरवरी तक संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, हालांकि अंतिम फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है। भारी सैन्य तैनाती, परमाणु कार्यक्रम पर दबाव और कूटनीतिक कोशिशों के बीच आने वाले दिन बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
सैन्य तैयारी पूरी, आदेश का इंतजार
Donald Trump ने अभी अंतिम आदेश नहीं दिया है, लेकिन अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि आदेश मिलता है तो कुछ ही घंटों में कार्रवाई शुरू की जा सकती है। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। रणनीतिक ठिकानों पर अतिरिक्त संसाधन तैनात किए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि स्थिति बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है।
विमानवाहक पोत और फाइटर जेट्स की तैनाती
दुनिया के सबसे आधुनिक विमानवाहक पोतों में शामिल USS Gerald R. Ford की क्षेत्र में मौजूदगी को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट्स और ईंधन टैंकर विमानों को भी मिडिल ईस्ट की ओर भेजा जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती किसी भी त्वरित ऑपरेशन को अंजाम देने की तैयारी का संकेत है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प
हाल ही में जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत हुई। हालांकि कुछ सिद्धांतों पर सहमति की बात सामने आई, लेकिन कई अहम मुद्दों पर स्पष्टता नहीं बन पाई है। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिया गया है कि कूटनीति पहली प्राथमिकता है, परंतु सैन्य विकल्प भी खुला है। यही अनिश्चितता वैश्विक बाजारों और राजनीतिक गलियारों में चिंता का कारण बनी हुई है।
परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा दबाव
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने संवेदनशील परमाणु ठिकानों को मजबूत कर रहा है। बताया जा रहा है कि कई स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परतों से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव किया जा सके। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्णायक होंगे अगले कुछ दिन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिन मिडिल ईस्ट की दिशा तय करेंगे। यदि बातचीत में प्रगति नहीं होती है तो क्षेत्र बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है। वहीं, आखिरी समय में कूटनीतिक सफलता मिलती है तो युद्ध टल भी सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं।