मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। एक ओर Donald Trump की सख्त चेतावनियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है, तो दूसरी तरफ 45 दिन के संभावित सीजफायर की चर्चा ने कूटनीतिक उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है और आने वाले घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
सीजफायर के लिए बैकडोर बातचीत तेज
तनाव कम करने के लिए पर्दे के पीछे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि Pakistan, Egypt और Turkey जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच गोपनीय स्तर पर बातचीत जारी है।
48 घंटे अहम, लेकिन डील मुश्किल
हालांकि बातचीत जारी है, लेकिन तुरंत किसी समझौते की उम्मीद कम जताई जा रही है। अगले 48 घंटे स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होंगे, लेकिन जानकार मानते हैं कि इतने कम समय में ठोस परिणाम निकलना कठिन है। इसके बावजूद यह कोशिश युद्ध को और बढ़ने से रोकने की अंतिम पहल मानी जा रही है।
डेडलाइन बढ़ी, पर सख्ती बरकरार
Donald Trump ने ईरान को दी गई समयसीमा में 24 घंटे का इजाफा जरूर किया है, लेकिन उनका रुख अब भी बेहद सख्त है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर तय समय तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान का जवाब- दबाव से नहीं झुकेंगे
अमेरिकी चेतावनियों पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि धमकियों और हमलों से कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सम्मान आधारित समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
टकराव या समझौता, फैसला करीब
वर्तमान हालात में एक ओर सैन्य तनाव चरम पर है, तो दूसरी ओर कूटनीति के रास्ते खुले हुए हैं। 45 दिन के सीजफायर की संभावनाओं ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अंतिम निर्णय आने वाले समय में ही होगा। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि हालात शांति की ओर बढ़ेंगे या संघर्ष और गहराएगा।