अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर लंबा ऑपरेशन चलाने की जानकारी दी, जबकि ईरान ने भी जवाबी हमलों और अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।
5 घंटे तक कई ठिकानों पर चला सैन्य अभियान
अमेरिकी सेना के अनुसार, पांच घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। दावा किया गया कि कार्रवाई का उद्देश्य मिसाइल, ड्रोन और रक्षा प्रणाली से जुड़े ठिकानों की क्षमता को कमजोर करना था। साथ ही मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान का पलटवार, ड्रोन गिराने का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ईरान ने अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
तेल बाजार में बढ़ी हलचल, महंगाई की चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में करीब दो प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण निवेशकों और ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो ईंधन की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ा संकट
हालिया घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य कदमों से समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति और कूटनीतिक प्रयास इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।