US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित शांति समझौते के बाद दोनों देशों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके क्रियान्वयन का है। उनके अनुसार, आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि समझौते की शर्तों को व्यवहारिक रूप से किस प्रकार लागू किया जाता है।
ट्रंप ने समझौते को बताया बड़ी उपलब्धि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में जारी तनाव को समाप्त करने, समुद्री व्यापार मार्गों को सुचारु बनाए रखने और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता लाने में मदद मिलेगी। ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता अमेरिका की प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं को पूरा करता है।
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परमाणु कार्यक्रम को लेकर अहम दावे
ट्रंप ने कहा कि समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने और उन्हें हासिल न करने का आश्वासन दिया है। उनके अनुसार, यह प्रतिबद्धता क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, समझौते के सभी प्रावधानों और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
समझौते के पालन पर टिकी आगे की राह
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि समझौते का भविष्य उसके पालन पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष द्वारा तय शर्तों का सम्मान नहीं किया जाता है तो आगे की रणनीति पर पुनर्विचार किया जा सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि दोनों देश समझौते को व्यवहारिक रूप से कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं और इससे क्षेत्रीय हालात में कितना बदलाव आता है।