अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के खत्म होने की उम्मीद ने पूरी दुनिया को राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते पर सहमति की घोषणा की है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मंजूरी भी दी गई है। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई होती है। इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों से लेकर भारत की अर्थव्यवस्था तक देखने को मिल सकता है।
तेल-गैस संकट होगा कम
ईरान और होर्मुज मार्ग में तनाव के कारण बीते कई महीनों से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर देश पर पड़ा। अब शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने लगा है। इससे भारत को तेल और गैस की सप्लाई बेहतर तरीके से मिल सकेगी और ऊर्जा संकट कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।
पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं सस्ते
कच्चे तेल की कीमत घटने का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की लागत कम होगी। इसके साथ ही रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर के दामों में भी राहत मिल सकती है। ईंधन सस्ता होने से ट्रांसपोर्ट का खर्च घटेगा, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और लोगों की जेब पर बोझ कम होगा।
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शेयर बाजार को मिला सहारा
वैश्विक तनाव कम होने का असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया है। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से बाजार में तेजी देखने को मिली। खासकर तेल और ऊर्जा से जुड़े सेक्टरों के शेयरों में मजबूती आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात सामान्य बने रहते हैं, तो विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार में फिर से निवेश बढ़ा सकते हैं। इससे बाजार को और मजबूती मिल सकती है।
रुपये को मिल सकती है मजबूती
कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल कम होगा। इससे देश का व्यापार घाटा घट सकता है और भारतीय रुपये पर दबाव कम होगा। पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा था, लेकिन अब इसमें सुधार की संभावना बढ़ गई है। मजबूत रुपया आयात लागत को और कम करेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।
प्रवासी भारतीयों को बड़ी राहत
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा हमेशा भारत की प्राथमिकता रहती है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से इन भारतीयों के रोजगार और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब शांति समझौते की उम्मीद से यह खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। इससे न सिर्फ भारतीय प्रवासियों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत और मध्य-पूर्व के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी सामान्य होने की संभावना बढ़ेगी।