करीब 107 दिनों तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते से न सिर्फ पश्चिमी एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी बड़ी राहत मिल सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलने की तैयारी में है और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने का रास्ता भी साफ होता दिखाई दे रहा है।
स्विट्जरलैंड में होंगे औपचारिक हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते के मसौदे पर सहमति जता दी है। दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से इस पर हस्ताक्षर करेंगे। समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म कर क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना है।
सैन्य कार्रवाई पर लगेगी रोक
समझौते के तहत दोनों देश तत्काल प्रभाव से सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमत हुए हैं। साथ ही क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। अगले 60 दिनों तक युद्धविराम की स्थिति बनाए रखने पर भी सहमति बनी है।
फ्रीज फंड और प्रतिबंधों पर होगी चर्चा
प्रस्तावित समझौते में ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, वित्तीय व्यवस्थाओं और अन्य लंबित मुद्दों पर भी चरणबद्ध बातचीत की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से ऊर्जा बाजार को राहत
शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने का रास्ता साफ हो गया है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का भरोसा
समझौते के मसौदे में ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार नहीं करने का भरोसा दिया है। हालांकि इस समझौते में इजरायल औपचारिक रूप से शामिल नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीति को लेकर कई देशों की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं।