पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका तेज हो गई है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए फाइटर जेट्स, एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और एडवांस एंटी-मिसाइल सिस्टम की तैनाती तेज कर दी है। उधर, इजरायल भी अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को अलर्ट मोड पर रखे हुए है। परमाणु कार्यक्रम, आंतरिक अशांति और कूटनीतिक बयानबाज़ी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
अमेरिकी सैन्य हलचल: कैरियर और फाइटर जेट्स की तैनाती
अमेरिका की ओर से अरब सागर और फारस की खाड़ी के आसपास बड़े स्तर पर सैन्य गतिविधियां देखी जा रही हैं। USS Abraham Lincoln की अगुवाई वाले कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अटैक सबमरीन और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर की तैनाती को ईरान पर दबाव बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही F-15E जैसे स्ट्राइक-capable फाइटर जेट्स और हवा में ईंधन भरने वाले KC-135 टैंकरों को भी क्षेत्र में शिफ्ट किया गया है, जिससे लंबी दूरी के अभियानों की क्षमता बढ़ जाती है।
एंटी-मिसाइल सिस्टम से सुरक्षा मजबूत
संभावित जवाबी हमलों के खतरे को देखते हुए अमेरिका अपने सहयोगी देशों में THAAD और Patriot जैसे एडवांस एंटी-मिसाइल सिस्टम की संख्या बढ़ा रहा है। इनका मकसद बैलिस्टिक मिसाइल या ड्रोन हमलों को हवा में ही नाकाम करना है। इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में इन प्रणालियों की मजबूती को आने वाले दिनों के लिए अहम सुरक्षा कवच माना जा रहा है।
परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक हालात से बढ़ा तनाव
ईरान के भीतर जारी प्रदर्शनों, मौतों के आंकड़ों को लेकर विवाद और संवर्धित यूरेनियम के भंडार से जुड़े सवालों ने अमेरिका-ईरान संबंधों में कड़वाहट बढ़ा दी है। जून 2025 में परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद कुछ सामग्री के ठिकाने को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे हैं। इस बीच, तेहरान को अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन निरीक्षण में देरी को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।
संभावित अमेरिकी रणनीति: सीमित स्ट्राइक से बड़ा दांव?
सैन्य जानकारों के मुताबिक अमेरिका अक्सर पहले “दंडात्मक” या सीमित हमले करता है, ताकि चेतावनी दी जा सके और कूटनीतिक रास्ता खुला रहे। आगे चलकर मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन नेटवर्क और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया जा सकता है। सबसे संवेदनशील विकल्प परमाणु ठिकानों पर सीधा हमला माना जा रहा है, जबकि सत्ता परिवर्तन जैसी रणनीति को बेहद महंगा और लंबा संघर्ष बताया जा रहा है।
ईरान और इजरायल की भूमिका: होर्मुज से एयर डिफेंस तक
ईरान की ओर से भी कड़े संकेत दिए गए हैं और क्षेत्रीय सहयोगी गुटों के जरिए दबाव बनाने की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़ा भू-आर्थिक हथियार Strait of Hormuz माना जाता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति गुजरता है। वहीं, अगर अमेरिका कार्रवाई करता है तो इजरायल संभावित “सेकेंडरी टारगेट” बन सकता है, इसलिए उसका Iron Dome और Arrow जैसे मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सतर्क मोड में रखा गया है।