अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पाकिस्तान में हुई अहम वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। इस कदम के जवाब में ईरान ने न सिर्फ कड़ी प्रतिक्रिया दी, बल्कि एक ‘गणितीय चेतावनी’ के जरिए वैश्विक तेल बाजार में संभावित उथल-पुथल का संकेत भी दे दिया है।
बातचीत विफल, तनाव चरम पर
पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। इस बातचीत में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे, लेकिन किसी ठोस सहमति पर पहुंचने में असफल रहे। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आए।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान किया। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने भी संकेत दिया है कि ईरानी बंदरगाहों की निगरानी और नियंत्रण को लेकर कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
ईरान का ‘गणित’ वाला जवाब
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने इस कदम का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर एक गणितीय फॉर्मूला साझा किया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि नाकाबंदी बढ़ती है, तो तेल की कीमतें सामान्य वृद्धि के बजाय कई गुना तेजी से बढ़ सकती हैं। उनका यह बयान वैश्विक बाजारों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
तेल कीमतों पर बड़ा असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। ऐसे में किसी भी प्रकार की नाकाबंदी से सप्लाई प्रभावित होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। ईरान ने इसी ‘चेन रिएक्शन’ की ओर इशारा किया है।
वैश्विक तनाव और अनिश्चितता बढ़ी
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। जहां एक ओर अमेरिका सख्ती दिखा रहा है, वहीं ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा। अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।